नाहन : हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में 108 और 102 एम्बुलेंस सेवाओं से जुड़े कर्मचारियों की प्रदेशव्यापी 5 दिवसीय सामूहिक हड़ताल आज दूसरे दिन में प्रवेश कर गई। जिला मुख्यालय नाहन में सीटू (CITU) जिला इकाई के बैनर तले एकत्रित हुए कर्मचारियों ने प्रदेश सरकार, जिला प्रशासन और मेड़सवान (Medswan) कंपनी प्रबंधन की कथित संवेदनहीन और मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। कर्मचारियों का स्पष्ट कहना है कि यह हड़ताल उनका कोई शौक नहीं है, बल्कि पिछले 15 वर्षों से हो रहे शोषण के विरुद्ध सम्मानजनक जीवन और अपने मौलिक अधिकारों की एक अनिवार्य लड़ाई है।
हड़ताल के दूसरे दिन कर्मचारियों ने अपनी मांगों को और प्रखरता से दोहराया। यूनियन के पदाधिकारियों के अनुसार, सरकार और ठेकेदार प्रबंधन की नीतियों के कारण आज वे सड़कों पर उतरने को मजबूर हुए हैं। उनका आरोप है कि कंपनी प्रबंधन न केवल उच्च न्यायालय और लेबर कोर्ट के न्यूनतम वेतन (₹20,000) के आदेशों की धज्जियां उड़ा रहा है, बल्कि महज ₹11,700 के अल्प वेतन पर उनसे 12-12 घंटे तक अमानवीय तरीके से काम लिया जा रहा है। कर्मियों ने रोष प्रकट किया कि जब भी वे अपने हक की बात करते हैं, तो उन्हें नौकरी से निकालने या वेतन काटने की धमकियां दी जाती हैं।

विरोध प्रदर्शन के दौरान सीटू नेताओं ने प्रशासन और सरकार को चेतावनी दी कि एम्बुलेंस कर्मियों का शोषण अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कर्मचारियों का कहना है कि उनकी ड्यूटी की प्रकृति आपातकालीन है, लेकिन उनके खुद के भविष्य की सुरक्षा के लिए कोई ठोस नीति नहीं है। एम्बुलेंस खराब होने की स्थिति में वेतन कटौती और सवैतनिक अवकाश न मिलना उनकी आर्थिक स्थिति को और दयनीय बना रहा है। दूसरे दिन के इस कड़े विरोध ने यह साफ कर दिया है कि यदि आगामी दिनों में कोई सकारात्मक समाधान नहीं निकला, तो यह आंदोलन और भी उग्र रूप धारण कर सकता है।
यूनियन ने एक बार फिर जनता से अपील की है कि वे उनकी मजबूरी को समझें। कर्मचारियों के अनुसार, अनुभवहीन स्टाफ के माध्यम से सेवाएं चलाने की कंपनी की कोशिशें मरीजों की जान को जोखिम में डाल रही हैं, जिसकी पूरी जिम्मेदारी ठेकेदार प्रबंधन और सरकार की होगी। फिलहाल, 5 दिनों की इस सांकेतिक हड़ताल ने स्वास्थ्य सेवाओं पर गहरा असर डाला है, और कर्मचारी अब आर-पार की लड़ाई के लिए अनिश्चितकालीन आंदोलन की ओर बढ़ने को तैयार दिख रहे हैं।