नाहन : जिला सिरमौर का जिला मेडिसन स्टोर लंबे समय से अव्यवस्थाओं के बीच केवल प्रतिनियुक्ति (डेपुटेशन) के सहारे चल रहा है। सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि करोड़ों रुपये वाले इस अहम स्टोर के लिए आज तक ‘मुख्य फार्मासिस्ट’ का पद ही सृजित नहीं किया गया है। वर्तमान में जिले भर के स्वास्थ्य संस्थानों को होने वाली दवाओं की आपूर्ति और उनका हिसाब-किताब अन्य केंद्रों से बुलाए गए फार्मासिस्टों के भरोसे है।
सूत्रों की मानें तो नाहन में मेडिकल कॉलेज की स्थापना के बाद से ही जिला स्वास्थ्य विभाग के प्रशासनिक ढांचे में कई बदलाव आए, लेकिन मेडिसिन स्टोर की मजबूती की ओर ध्यान नहीं दिया गया। कॉलेज प्रशासन और सीएमओ कार्यालय के बीच कार्यक्षेत्र के बंटवारे के बाद जिला मेडिसिन स्टोर के लिए स्थायी पदों का सृजन न होना एक बड़ी खामी बनकर उभरा है। वर्तमान में कार्यभार कई गुना बढ़ चुका है, लेकिन जवाबदेही तय करने के लिए कोई नियमित अधिकारी तैनात नहीं है।

विदित रहे कि जिला मेडिसन स्टोर पूरे सिरमौर जिले की लाइफलाइन है। यहाँ से सभी नागरिक अस्पतालों, सीएचसी और पीएचसी को दवाइयां भेजी जाती हैं। स्टॉक रजिस्टर का संधारण, एक्सपायरी डेट की ट्रैकिंग, कोल्ड चेन मैनेजमेंट और करोड़ों का वित्तीय ऑडिट जैसे संवेदनशील कार्य बिना किसी नियमित और स्थायी जवाबदेह अधिकारी के करना काफी जोखिमपूर्ण है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रतिनियुक्ति पर आए कर्मचारी अस्थायी होते हैं, जिससे दीर्घकालिक प्रबंधन और रिकॉर्ड की शुद्धता प्रभावित होने का डर रहता है।
स्वास्थ्य विभाग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि वर्तमान कार्यप्रणाली को देखते हुए कम से कम दो नियमित फार्मासिस्टों की की तैनाती आवश्यक है । इसमें एक फार्मासिस्ट मुख्य रूप से स्टॉक एवं ऑडिट के लिए और दूसरा मांग एवं आपूर्ति के समन्वय के लिए होना चाहिए। जब तक स्थायी पद सृजित नहीं होते, तब तक व्यवस्था में पारदर्शिता और कुशलता लाना विभाग के लिए बड़ी चुनौती बना रहेगा।
इस मामले पर सीएमओ सिरमौर डॉ. राकेश प्रताप ने स्पष्ट किया कि विभाग इस समस्या से भली-भांति अवगत है। उन्होंने कहा, “जिला मेडिसन स्टोर में चीफ फार्मासिस्ट का पद सृजित न होना एक तकनीकी बाधा है। इस मुद्दे को निदेशालय के माध्यम से उच्चाधिकारियों और सरकार के समक्ष प्रमुखता से उठाया गया है। हमें पूरी उम्मीद है कि जल्द ही पद सृजन के साथ नियमित नियुक्तियां होंगी, जिससे जिले की दवा वितरण प्रणाली को सुदृढ़ किया जा सके।”