सोलन: सेब के बागीचों में समय से पहले पत्तियां झड़ने और फलों की गुणवत्ता खराब करने वाले ‘अल्टरनेरिया लीफ स्पॉट’ और ‘मार्सोनिना लीफ ब्लॉच’ रोगों के प्रभावी प्रबंधन के लिए डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय (UHF), नौणी ने कमर कस ली है। विश्वविद्यालय, बागवानी विभाग के सहयोग से 10 फरवरी से 16 फरवरी, 2026 तक एक सप्ताह का राज्यव्यापी जागरूकता अभियान शुरू करने जा रहा है।

हाल के वर्षों में आर्द्र वातावरण के कारण ये बीमारियां सेब उत्पादन के लिए गंभीर चुनौती बनकर उभरी हैं। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य किसानों को इन रोगों के लक्षणों की पहचान करवाना और वैज्ञानिक तकनीकों के माध्यम से ‘रोग चक्र’ को तोड़ना है।
अभियान को सफल बनाने के लिए विश्वविद्यालय ने वैज्ञानिकों और बागवानी अधिकारियों की 8 विशेषज्ञ टीमें गठित की हैं। इनमें नौणी मुख्य परिसर के अलावा मशोबरा, बजौरा और शारबो (किन्नौर) अनुसंधान केंद्रों तथा शिमला, सोलन, चंबा और किन्नौर के कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK) के वैज्ञानिक शामिल हैं। शिमला जिले के लिए सर्वाधिक 4 टीमें बनाई गई हैं जो बाघी, रतनाड़ी, कलबोग, ठियोग, रोहड़ू, चौपाल और ननखड़ी जैसे प्रमुख सेब उत्पादक क्षेत्रों का दौरा करेंगी।
वहीं, किन्नौर में निचार, कल्पा और रिब्बा; चंबा में भरमौर, पांगी और सलूणी; कुल्लू में मणिकर्ण और बंजार घाटी; तथा मंडी में करसोग और जंजैहली घाटी में विशेषज्ञ टीमें किसानों के खेतों में जाकर संवाद और प्रदर्शन करेंगी। विश्वविद्यालय प्रशासन ने उम्मीद जताई है कि इस पहल से प्रदेश की सेब आर्थिकी को सुदृढ़ करने में मदद मिलेगी।