सोलन: डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी के नाम एक और बड़ी उपलब्धि जुड़ी है। विश्वविद्यालय के पुष्पकृषि एवं लैंडस्केपिंग विभाग के युवा वैज्ञानिक डॉ. अंशुल कुमार को उनके उत्कृष्ट शोध कार्य के लिए प्रतिष्ठित ‘बेस्ट डॉक्टोरल डिसर्टेशन अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया है। उन्हें यह सम्मान उनके द्वारा विकसित की गई ‘हर्बल गुलाल’ तकनीक और उस पर किए गए गहन शोध के लिए प्रदान किया गया है।
डॉ. अंशुल कुमार ने अपना पीएच.डी. शोध कार्य “स्टडीज ऑन स्टोरेबिलिटी, फिजिको-केमिकल एंड सेंसरी कैरेक्टरिस्टिक्स ऑफ गुलाल डिराइव्ड फ्रॉम फ्रेश एंड ड्राइड मैरीगोल्ड फ्लावर्स” विषय पर पूर्ण किया है। सरल शब्दों में कहें तो उन्होंने ताजे और सूखे गेंदे के फूलों से प्राकृतिक व सुरक्षित गुलाल बनाने, उसे लंबे समय तक सुरक्षित रखने और उसकी गुणवत्ता बढ़ाने की तकनीक विकसित की है। यह शोध कार्य विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. भारती कश्यप के कुशल मार्गदर्शन में संपन्न हुआ।

यह गौरवपूर्ण पुरस्कार ‘इंडियन सोसाइटी ऑफ ऑर्नामेंटल हॉर्टिकल्चर’ द्वारा आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन “Floriculture and Landscaping @ 2047 Viksit Bharat” के दौरान प्रदान किया गया। इस सम्मेलन का आयोजन केलाडी शिवप्पा नायक कृषि एवं उद्यानिकी विज्ञान विश्वविद्यालय (कर्नाटक) में किया गया था, जहां देशभर से आए दिग्गज वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं ने शिरकत की।
डॉ. अंशुल का यह शोध केवल कागजों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यावसायिक रूप से भी सफल सिद्ध हो रहा है। यह अनुसंधान CSIR-IHBT (पालमपुर) के सहयोग से पूरा हुआ है। इस तकनीक के माध्यम से तैयार हर्बल गुलाल का उत्पादन और बिक्री विभाग द्वारा की जा रही है, जिससे विश्वविद्यालय को आय भी प्राप्त हो रही है। यह नवाचार न केवल पर्यावरण के अनुकूल है, बल्कि किसानों के लिए फूलों की खेती को और अधिक लाभदायक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
इस राष्ट्रीय उपलब्धि पर विश्वविद्यालय प्रबंधन और क्षेत्र के प्रबुद्ध जनों ने डॉ. अंशुल कुमार और उनकी गाइड डॉ. भारती कश्यप को बधाई दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के शोध से ‘विकसित भारत’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प को मजबूती मिलेगी।