सोलन: राजकीय महाविद्यालय सोलन में इतिहास, संस्कृत और दर्शनशास्त्र विभागों के संयुक्त तत्वावधान में एक दिवसीय “धरोहर दर्शन: जहाँ इतिहास बोलता है” कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। कॉलेज की प्राचार्या डॉ. मनीषा कोहली की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम ने छात्रों को प्राचीन भारतीय संस्कृति और इतिहास की अमूल्य धरोहरों से रूबरू कराया। इस अनूठे आयोजन का मुख्य उद्देश्य छात्रों को भारतीय इतिहास के स्रोतों और वास्तुकला शैलियों का प्रत्यक्ष अनुभव देना था।

इतिहास विभाग की प्रो. भुवनेश्वरी कश्यप और प्रो. प्रमोद के नेतृत्व में पाषाण युग की संस्कृति के मॉडल, प्राचीन शिलालेख, लिपियां, सिक्के और मूर्तिकला के मूल स्रोत प्रदर्शित किए गए। प्रदर्शनी में भारतीय मंदिर वास्तुकला की नागर, द्रविड़ और वेसर शैलियों के साथ-साथ हिमाचल की विशिष्ट पहाड़ी ‘पेंट रूफ़’ शैली के मॉडल विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। छात्रों ने पारंपरिक वेशभूषा, आभूषण और व्यंजनों के स्टॉल लगाकर अपनी संस्कृति का सजीव चित्रण किया। बीए तृतीय वर्ष की छात्रा अंशिका ने कांगड़ा के मसरूर स्थित रॉक-कट मंदिर और छात्र तनुज ठाकुर ने हिमाचल की काष्ठ कला पर प्रभावशाली प्रस्तुतियां दीं।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि प्राचार्या डॉ. मनीषा कोहली ने इस पहल की सराहना करते हुए छात्रों को इतिहास के प्रति गहरी समझ विकसित करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने छात्रों के उत्साहवर्धन के लिए अपने निजी संग्रह से दुर्लभ सिक्कों, अंतरराष्ट्रीय मुद्राओं और डाक टिकटों का प्रदर्शन भी किया। इसके साथ ही, उन्होंने कॉलेज में भविष्य में एक स्थायी संग्रहालय (Museum) स्थापित करने की इच्छा जाहिर की। कार्यक्रम के अंत में संस्कृत विभाग के डॉ. विवेक शर्मा ने सभी आयोजकों और स्टाफ का धन्यवाद किया। इस सफल आयोजन में डॉ. घनश्याम और बी.वॉक विभाग के सौरव का भी अहम योगदान रहा।