नाहन : मंडी ज़िले के तारना वृत्त में पल्स पोलियो अभियान के दौरान ड्यूटी निभाते हुए गिरने से आंगनवाड़ी कार्यकर्ता हर्षा की हुई मौत ने एक बार फिर हिमाचल प्रदेश में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की सुरक्षा और जवाबदेही के गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस घटना के विरोध में 8 जनवरी को पूरे प्रदेश में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा प्रदेश-स्तरीय प्रदर्शन किया जाएगा।
आंगनवाड़ी वर्कर्स एवं हेल्परज यूनियन (सीटू) से जुड़ी जिला व परियोजना स्तरीय इकाइयों के पदाधिकारियों, जिला अध्यक्ष श्यामा, महासचिव वीना, पांवटा परियोजना अध्यक्ष इंदु तोमर व महासचिव देव कुमारी, सरांह परियोजना अध्यक्ष वंदना व महासचिव शामा, नाहन परियोजना अध्यक्ष सुमन व महासचिव शीला ठाकुर, संगड़ाह परियोजना अध्यक्ष नीलम व महासचिव शीला, शिलाई परियोजना अध्यक्ष अनीता व महासचिव चंदरकला तथा राजगढ़ परियोजना अध्यक्ष सविता और शशि ठाकुर ने जारी प्रेस बयान में सरकार की कड़ी आलोचना की है।

यूनियन ने कहा कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं से पल्स पोलियो, BLO ड्यूटी, फेस ट्रैकिंग, हाउस-टू-हाउस सर्वे जैसे विभिन्न विभागों के कार्य कराए जाते हैं, लेकिन जब किसी दुर्घटना या मौत की बात आती है तो न विभाग जिम्मेदारी लेता है और न ही सरकार आगे आती है।
उन्होंने कहा कि यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले कुल्लू के सैंज क्षेत्र और जून 2024 में चंबा ज़िले में मीटिंग में जाते समय आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं सरला और श्रेष्टा की सड़क दुर्घटना में मौत हो चुकी है। ऐसे मामलों में यह सवाल लगातार उठ रहा है कि क्या आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की जान की कोई कीमत नहीं?
यूनियन ने मांग की है कि मृतक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता हर्षा के परिजनों को तुरंत 50 लाख रुपये का मुआवज़ा दिया जाए और पूर्व में ड्यूटी के दौरान हुई सभी मौतों पर भी समान मुआवज़ा सुनिश्चित किया जाए। साथ ही जिस विभाग के लिए कार्यकर्ता ड्यूटी निभा रही हो, उसकी स्पष्ट जवाबदेही तय की जाए।
यूनियन नेतृत्व ने यह भी मांग रखी कि सभी आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को दुर्घटना बीमा, जोखिम भत्ता और सामाजिक सुरक्षा प्रदान की जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इस बार भी मांगों को नजरअंदाज किया, तो आंदोलन केवल प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहेगा।
यूनियन ने दो टूक कहा कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ता कोई स्वयंसेवक नहीं, बल्कि व्यवस्था की रीढ़ हैं और उनकी जान के साथ हो रहा खिलवाड़ अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। समय रहते यदि सरकार ने मुआवज़ा और विभागीय जिम्मेदारी सुनिश्चित नहीं की, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रदेश सरकार और संबंधित विभागों की होगी।