शिमला: हिमाचल प्रदेश को देश का पहला ‘हरित ऊर्जा राज्य’ बनाने की दिशा में सुक्खू सरकार ने एक और बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि प्रदेश के सभी स्वास्थ्य संस्थानों के भवनों पर चरणबद्ध तरीके से ‘रूफटॉप सोलर सिस्टम’ (छत पर सौर ऊर्जा संयंत्र) स्थापित किए जाएं।

मुख्यमंत्री ने बुधवार को एक समीक्षा बैठक के दौरान कहा कि इस पहल से न केवल बिजली के बिलों में भारी कमी आएगी और सरकारी धन की बचत होगी, बल्कि यह हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के सरकार के संकल्प को भी मजबूती देगा। उन्होंने कहा कि हिमाचल की सालाना ऊर्जा खपत लगभग 13 हजार मिलियन यूनिट है और सरकार का लक्ष्य है कि इस खपत का 90 प्रतिशत से अधिक हिस्सा नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से पूरा कर राज्य को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाया जाए।
सरकार ने अगले दो वर्षों के भीतर प्रदेश में 500 मेगावाट क्षमता की सौर ऊर्जा परियोजनाएं स्थापित करने का लक्ष्य रखा है, जिसके सकारात्मक परिणाम अब धरातल पर दिखने लगे हैं। ऊना जिले में स्थापित सौर परियोजनाओं ने रिकॉर्ड उत्पादन और राजस्व अर्जित किया है। 15 अप्रैल 2024 को शुरू हुई 32 मेगावाट की पेखूबेला परियोजना ने अब तक 22.91 करोड़ रुपये, जबकि 30 नवंबर 2024 को शुरू हुई 5 मेगावाट की भंजाल परियोजना ने 3.10 करोड़ रुपये का राजस्व राज्य के खजाने में जमा कराया है। इसके अलावा, मई 2025 में शुरू हुई अघलौर परियोजना (10 मेगावाट) भी अब तक 5.89 मिलियन यूनिट बिजली का उत्पादन कर चुकी है। कांगड़ा जिले के डमटाल क्षेत्र में बंजर भूमि पर 200 मेगावाट का विशाल सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने की योजना पर भी तेजी से काम चल रहा है।
इस महाअभियान में ग्राम पंचायतों को केंद्रीय भूमिका में रखते हुए सरकार ने ‘ग्रीन पंचायत कार्यक्रम’ शुरू किया है। इसके तहत पंचायतों में 500 किलोवाट क्षमता की ‘ग्राउंड माउंटेड’ सौर परियोजनाएं लगाई जा रही हैं। पहले चरण में 24 पंचायतों को मंजूरी मिल चुकी है और 16 में काम शुरू हो गया है। इस योजना का सबसे मानवीय पहलू यह है कि इन परियोजनाओं से होने वाली कमाई का 20 प्रतिशत हिस्सा संबंधित पंचायत के अनाथ बच्चों और विधवाओं की आर्थिक सहायता के लिए खर्च किया जाएगा।
इसके अतिरिक्त, ‘पहले आओ-पहले पाओ’ के आधार पर निजी निवेशकों को 250 किलोवाट से 5 मेगावाट तक की परियोजनाएं आवंटित की जा रही हैं। अब तक 547 निवेशकों के साथ समझौतों पर काम चल रहा है और हिमऊर्जा द्वारा भी 150 मेगावाट से अधिक की परियोजनाएं शुरू की जा चुकी हैं।