शिमला: वित्त वर्ष 2026-27 की विधायक प्राथमिकताओं को तय करने के लिए आयोजित बैठक के दूसरे दिन मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने केंद्र सरकार और 16वें वित्त आयोग के फैसलों पर तीखी प्रतिक्रिया दी। शनिवार को कुल्लू, मंडी और शिमला जिलों के विधायकों के साथ बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि 16वें वित्त आयोग द्वारा राजस्व घाटा अनुदान (RDG) को बंद करने का निर्णय हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य के लिए बड़ा झटका है। इससे प्रदेश को लगभग 50,000 करोड़ रुपये का भारी नुकसान होगा, जिसका सीधा असर विकास कार्यों, वेतन और पेंशन पर पड़ेगा। उन्होंने केंद्र के बजट में हिमाचल को ‘बौद्ध सर्किट’ से बाहर रखने को भी भेदभावपूर्ण करार दिया।

मुख्यमंत्री ने प्रदेश की वित्तीय स्थिति को सुधारने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का ब्योरा भी दिया। उन्होंने बताया कि सरकार ने पिछले तीन वर्षों में अपने संसाधनों से 26,683 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया है। सरकार की कानूनी पैरवी के चलते ‘वाइल्ड फ्लावर हॉल’ होटल का स्वामित्व वापस मिलने से 401 करोड़ रुपये का लाभ हुआ है और अब सालाना 20 करोड़ रुपये की आय होगी। इसके अलावा, कड़छम-वांगतू जल विद्युत परियोजना में राज्य की रॉयल्टी 12% से बढ़ाकर 18% कर दी गई है, जिससे हर साल 150 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय सुनिश्चित होगी।
बैठक में विधायकों ने अपने क्षेत्रों की प्रमुख मांगें रखीं। कुल्लू जिले से मनाली विधायक भुवनेश्वर गौड़ ने आइस स्केटिंग रिंक और कुल्लू विधायक सुंदर सिंह ठाकुर ने हवाई अड्डे के विस्तार व मणिकर्ण के लिए वैकल्पिक सड़क की मांग की। मंडी जिले से विधायक अनिल शर्मा ने मंडी बाईपास और जेल शिफ्ट करने का मुद्दा उठाया, जबकि धर्मपुर विधायक चंद्रशेखर ने दूध के चिलिंग प्लांट की मांग की। शिमला जिले के चौपाल विधायक बलबीर वर्मा ने बर्फबारी के दौरान बिजली आपूर्ति के लिए शिलाई से लाइन जोड़ने का आग्रह किया। बैठक में लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह और शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर भी उपस्थित रहे।