शिमला : ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री ने आज विधानसभा में प्रश्न के जवाब में बताया कि प्रदेश में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एन.आर.एल.एम.) के तहत 42,498 स्वयं सहायता समूह पंजीकृत हैं। यह जानकारी मलेन्द्र राजन (इन्दौरा) द्वारा पूछे गए प्रश्न के उत्तर में दी गई, जिसमें स्वयं सहायता समूहों की संख्या और उन्हें बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों के बारे में पूछा गया था।
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री ने बताया कि इन स्वयं सहायता समूहों से 3.40 लाख ग्रामीण महिलाएं जुड़ी हैं। एन.आर.एल.एम. योजना, जो वर्ष 2013-14 से राज्य में लागू है, के तहत महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और स्वावलंबन को प्रोत्साहित करने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं। इन समूहों को सतत आजीविका के अवसर प्रदान करने के लिए सरकार ने विभिन्न योजनाएं और गतिविधियाँ शुरू की हैं।

मंत्री ने आगे बताया कि स्वयं सहायता समूहों द्वारा निर्मित उत्पादों को उचित बाजार उपलब्ध कराने के लिए हिमईरा ई-कॉमर्स वेबसाइट, हिमईरा कैफे और स्वयं सहायता समूहों द्वारा संचालित हिमईरा दुकानों की स्थापना की गई है। ये पहल महिलाओं के उत्पादों की ब्रांडिंग और विपणन को बढ़ावा देने के साथ-साथ उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में मदद कर रही हैं।
कृषि से जुड़े स्वयं सहायता समूहों को प्रोत्साहित करने के लिए उनके सदस्यों को उन्नत तकनीकों का प्रशिक्षण, आधुनिक उपकरणों की सुविधा और किसान उत्पादक समूह (FPG) 및 किसान उत्पादक संगठन (FPO) के गठन के माध्यम से उनकी क्षमताओं का विकास किया जा रहा है। इससे न केवल किसानों की उत्पादकता बढ़ रही है, बल्कि उनके उत्पादों की बेहतर बाजार उपलब्धता भी सुनिश्चित हो रही है।