शिमला: हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में नर्सरी शिक्षक प्रशिक्षण (NTT) भर्ती और प्री-प्राइमरी कक्षाओं के संचालन को लेकर शिक्षा विभाग ने स्थिति स्पष्ट कर दी है। विधानसभा में डॉ. जनक राज और सुख राम चौधरी द्वारा पूछे गए संयुक्त प्रश्न के उत्तर में शिक्षा मंत्री ने भर्ती के कड़े मापदंडों और वर्तमान व्यवस्था का ब्यौरा पेश किया ।
सरकार ने जानकारी दी है कि प्रदेश में NTT के 6,297 पद विज्ञापित किए गए हैं । इन पदों के लिए राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद (NCTE) द्वारा निर्धारित नियमों का पालन करना अनिवार्य है । अभ्यर्थी मान्यता प्राप्त बोर्ड से कम से कम 50% अंकों के साथ 12वीं कक्षा उत्तीर्ण होना चाहिए । नर्सरी अध्यापक शिक्षा या प्रारंभिक शैशवावस्था शिक्षा कार्यक्रम (D.E.C.Ed.) में कम से कम दो वर्ष की अवधि का डिप्लोमा अनिवार्य है । इसके अलावा, NCTE से मान्यता प्राप्त संस्थान से B.Ed (नर्सरी) करने वाले अभ्यर्थी भी पात्र होंगे ।

सरकार ने स्वीकार किया कि NCTE की गाइडलाइन्स के अनुसार योग्य उम्मीदवारों की कमी है । इस समस्या के समाधान के लिए राज्य सरकार ने केंद्र (NCTE) से नियमों में शिथिलता (Relaxation) देने का अनुरोध किया था, हालांकि अभी तक इस पर कोई अनुमति प्राप्त नहीं हुई है । भविष्य में योग्य शिक्षकों की कमी को पूरा करने के लिए सरकार अब प्रदेश के DIETs (जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान) के माध्यम से स्वयं NTT प्रशिक्षण शुरू करने पर विचार कर रही है ।
वर्तमान में प्रदेश की 6,409 प्राथमिक पाठशालाओं में प्री-प्राइमरी कक्षाएं सफलतापूर्वक चलाई जा रही हैं । इन कक्षाओं की सहायता के लिए चार जिलों—हमीरपुर, मंडी, ऊना और सिरमौर—में ‘आया’ के 334 पद भर लिए गए हैं । जहाँ तक NTT शिक्षकों की बात है, राज्य इलेक्ट्रॉनिक विकास निगम (State Electronics Development Corporation) के माध्यम से इनकी भर्ती प्रक्रिया अभी जारी है ।
भविष्य में पात्रता शर्तों की समीक्षा के लिए किसी समिति के गठन की संभावना से सरकार ने इनकार कर दिया है । शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि पात्रता शर्तें राष्ट्रीय स्तर पर NCTE द्वारा निर्धारित की जाती हैं और राज्य सरकार को इन अधिसूचनाओं का पालन करना अनिवार्य होता है, इसलिए प्रदेश स्तर पर इनमें बदलाव नहीं किया जा सकता ।