नाहन : आज के दौर में जहाँ चिकित्सा एक बड़ा कारोबार बन चुकी है, वहीं सिरमौर जिला के नाहन में एक ऐसी शख्सियत भी है जो बिना किसी स्वार्थ और लालच के मानवता की सेवा में जुटी है। पीडब्ल्यूडी (PWD) विभाग में कार्यरत विद्या दत्त शर्मा पिछले कई दशकों से हड्डी जोड़ने और मोच आदि का इलाज करने की अपनी पुश्तैनी विद्या के जरिए हजारों लोगों को दर्द से निजात दिला रहे हैं।
विद्या दत्त शर्मा बताते हैं कि यह कार्य उनके परिवार में कई सदियों से चला आ रहा है। उनके दादा जी ‘राजवैद्य’ के रूप में सेवा करते थे, जिसके बाद उनके पिता ने इस बागडोर को संभाला। वह दौर ऐसा था जब डॉक्टरों की कमी थी और जड़ी-बूटियों व घरेलू उपचार से ही हड्डियों की टूट-फूट और मोच का इलाज किया जाता था।

शर्मा जी की इस विद्या को सीखने की कहानी भावुक करने वाली है। उनके पिता PWD विभाग में थे और एक दुर्घटना के कारण उनका हाथ ठीक से काम नहीं करता था। पिता की मदद के लिए 8-10 साल की उम्र से ही विद्या दत्त उनके साथ काम करने लगे। पिता का मार्गदर्शन और भगवान का आशीर्वाद ऐसा मिला कि आज वह अकेले ही इस जिम्मेदारी को बखूबी निभा रहे हैं।
विद्या दत्त शर्मा के पास न केवल नाहन, बल्कि चार-पांच पड़ोसी राज्यों से भी लोग उपचार के लिए आते हैं। प्रतिदिन वह 100 से 200 मरीजों को देखते हैं। खास बात यह है कि वह किसी भी मरीज से कोई फीस या खर्चा नहीं मांगते। वह कहते हैं, “हमारा काम सेवा करना है। अगर मरीज ठीक हो सकता है तो हम हाथ लगाते हैं, वरना तुरंत उसे ऑपरेशन की सलाह देकर विशेषज्ञ के पास भेज देते हैं।”
जामटा से आई विद्या देवी ने बताया कि वह अपने पैरों के असहनीय दर्द के इलाज के लिए यहाँ पहुँची हैं। उन्हें विश्वास है कि शर्मा जी के पास उन्हें निश्चित रूप से आराम मिलेगा। वहीं खिजराबाद (पांवटा साहिब) से आए एक परिवार ने बताया कि उनके भांजे की गिरने के कारण पीठ में गंभीर चोट आई है। उन्होंने साझा किया कि वे पहली बार यहाँ नहीं आए हैं, बल्कि इससे पहले भी कई परिचितों को यहाँ ला चुके हैं और हर बार उन्हें बेहतरीन परिणाम (Results) मिले हैं।
सेवा के प्रति उनका समर्पण ऐसा है कि साल 1994 से लेकर आज तक उन्हें कभी सुकून से लंच करने तक का समय नहीं मिला। वह कहते हैं, “लोग सेवा करते हैं, लेकिन सेवा में पागल होना पड़ता है। दूसरों का दुख सहन करना पड़ता है। मेरे पास रात हो या दिन, जब भी कोई दुखी व्यक्ति आता है, मैं सेवा के लिए तत्पर रहता हूँ।”
आज जहाँ इलाज के नाम पर बड़ी-बड़ी फीस वसूली जाती है, वहीं विद्या दत्त शर्मा जैसे लोग समाज के लिए एक प्रेरणा हैं। सरकारी सेवा (PWD) के साथ-साथ अपनी पुश्तैनी विद्या को जीवित रखना और उसे जन-कल्याण के लिए समर्पित करना, सच्चे अर्थों में मानवता की सेवा है।