शिमला: 8वें वेतन आयोग की कोलकाता में आयोजित हो रही महत्वपूर्ण बैठक के बीच हिमाचल प्रदेश राज्य कर्मचारी महासंघ ने अपनी प्रमुख मांगों को लेकर आवाज बुलंद कर दी है। महासंघ के प्रदेशाध्यक्ष नरेश कुमार ने इस बैठक को कर्मचारियों और पेंशनरों के भविष्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए केंद्र सरकार और आयोग से कर्मचारियों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि आयोग की सिफारिशें वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों, बढ़ती महंगाई और कर्मचारियों की वास्तविक आवश्यकताओं के बिल्कुल अनुकूल होनी चाहिए।

नरेश कुमार ने महासंघ की ओर से रखी गई प्रमुख मांगों को साझा करते हुए बताया कि वर्तमान में निर्धारित ₹18,000 के न्यूनतम मूल वेतन को बढ़ाकर सीधे ₹69,000 किया जाना चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि पिछले कुछ वर्षों में देश के भीतर महंगाई, बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, आवास, परिवहन तथा दैनिक उपयोग की आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में अप्रत्याशित भारी वृद्धि हुई है, जिसके कारण वर्तमान वेतन कर्मचारियों को एक सम्मानजनक जीवन-यापन करने के लिए पर्याप्त नहीं है। इसके साथ ही, कर्मचारियों एवं पेंशनरों को वास्तविक वेतन वृद्धि का लाभ देने तथा वेतन विसंगतियों का स्थायी समाधान करने के लिए 3.833 फिटमेंट फैक्टर को तुरंत लागू किया जाना चाहिए।
महासंघ ने भत्तों और महंगाई भत्ते (DA) को लेकर भी एक ठोस नीति बनाने की वकालत की है। नरेश कुमार ने कहा कि कर्मचारियों को मिलने वाले मकान किराया भत्ता (HRA), परिवहन भत्ता (TA), बच्चों का शिक्षा भत्ता, चिकित्सा भत्ता और विशेष/जोखिम भत्तों में मौजूदा खर्चों के अनुरूप पर्याप्त बढ़ोतरी की जाए, क्योंकि वर्षों से इनमें कोई बड़ा संशोधन न होने से कर्मचारियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। इसके अलावा, महासंघ ने मांग उठाई है कि वर्तमान में चल रहे 50 प्रतिशत महंगाई भत्ते (DA) को तत्काल मूल वेतन में मर्ज (समाहित) किया जाए। साथ ही भविष्य के लिए भी यह स्पष्ट प्रावधान बने कि जब भी डीए 50 प्रतिशत तक पहुंचे, तो वह स्वतः ही मूल वेतन का हिस्सा बन जाए, ताकि कर्मचारियों और पेंशनरों को उनके वेतन, पेंशन तथा अन्य सेवा लाभों का वास्तविक व स्थायी फायदा मिल सके।
भारतीय सामाजिक और पारिवारिक व्यवस्था का हवाला देते हुए महासंघ के अध्यक्ष ने न्यूनतम वेतन निर्धारण के लिए लागू ‘फैमिली यूनिट फॉर्मूला’ में भी बड़े बदलाव की मांग की है। उन्होंने कहा कि न्यूनतम वेतन तय करते समय परिवार की तीन यूनिट के स्थान पर पाँच यूनिट को आधार बनाया जाए तथा आश्रित माता-पिता एवं सास-ससुर को भी कानूनी रूप से इस परिवार का अनिवार्य हिस्सा माना जाए।
नरेश कुमार ने पूरे देश के सरकारी कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना (OPS) को पुनः बहाल करने की मांग को सबसे प्रमुखता से दोहराया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सेवानिवृत्ति (रिटायरमेंट) के बाद सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा पाना प्रत्येक कर्मचारी का बुनियादी अधिकार है। वर्तमान अंशदायी पेंशन व्यवस्था (NPS) कर्मचारियों को एक सुनिश्चित और सम्मानजनक बुढ़ापे की गारंटी नहीं देती, इसलिए बिना किसी भेदभाव के सभी कर्मचारियों को समान रूप से पुरानी पेंशन योजना के दायरे में लाया जाना चाहिए।
महासंघ ने केंद्र सरकार से पुरजोर अपील की है कि वह तमाम कर्मचारी संगठनों द्वारा दिए जा रहे इन महत्वपूर्ण सुझावों और मांगों पर पूरी गंभीरता से विचार करे। 8वें वेतन आयोग की इन दूरगामी सिफारिशों को एक निश्चित समय सीमा के भीतर लागू किया जाना चाहिए, जिससे न केवल देशभर के करोड़ों कर्मचारियों का मनोबल बढ़ेगा, बल्कि प्रशासनिक कार्यक्षमता में भी बड़ा सुधार देखने को मिलेगा।