नाहन : “नई दिल्ली के भारत मंडपम में संपन्न हुए इंडिया एआई समिट का सार साफ है: तकनीक बदल रही है, और इसके साथ हमें भी बदलना होगा। वह दौर बीत गया जब सिर्फ बेसिक कंप्यूटर कोर्स नौकरी की गारंटी थे, अब दौर AI के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने का है…”
आज दुनिया भर में यह धारणा बन रही है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) लोगों की नौकरियां छीन लेगा, लेकिन असलियत इसके उलट है। विशेषज्ञों का मानना है कि AI काम को खत्म नहीं कर रहा, बल्कि पुराने और बोझिल हो चुके रोजगार के तरीकों को बदल रहा है। यह तकनीक इंसानों को उन कामों से मुक्त कर रही है जो दोहराव वाले और उबाऊ थे, ताकि वे अपनी रचनात्मक क्षमता का बेहतर इस्तेमाल कर सकें।

रिपोर्ट के अनुसार, AI उन कार्यों को बहुत तेजी और सटीकता से कर सकता है जिनमें ज्यादा रचनात्मक सोच की जरूरत नहीं होती, जैसे डेटा का विश्लेषण करना, सामान्य कोड लिखना, रिपोर्ट बनाना या दस्तावेजों को व्यवस्थित करना। पहले इन कामों के लिए बड़ी संख्या में जूनियर कर्मचारियों की जरूरत होती थी, लेकिन अब यही काम AIई कुछ ही मिनटों में कर देता है। इसका सीधा संदेश छात्रों और युवाओं के लिए यह है कि अब केवल ‘बेसिक कंप्यूटर कोर्स’ जैसे वर्ड या एक्सेल सीखकर आप नौकरी की गारंटी नहीं पा सकते। अब डिग्री के साथ-साथ ‘AI-सक्षम’ होना अनिवार्य हो गया है।
इतिहास गवाह है कि जब भी कोई नई तकनीक आई, उसने पुराने कामों को बदला लेकिन नए अवसर भी पैदा किए। जिस तरह कंप्यूटर आने से बैंकों में काम की रफ्तार बढ़ी, वैसे ही AI जानकारी और सुझाव तो दे सकता है, लेकिन अंतिम निर्णय लेना और जटिल मानवीय समस्याओं को समझना अभी भी इंसान की ही जिम्मेदारी है। उदाहरण के लिए, एआई कोडिंग कर सकता है, लेकिन वह कोड समाज के लिए कितना उपयोगी होगा, यह एक इंसान ही तय करता है। इसी तरह, AI डॉक्टर को बीमारी की पहचान में मदद कर सकता है, लेकिन मरीज की भावनाओं और उसकी स्थिति को केवल एक डॉक्टर ही समझ सकता है।
इस बदलाव का सबसे महत्वपूर्ण परिणाम यह है कि अब केवल डिग्रीधारी होना काफी नहीं होगा। आने वाले समय में सोचने की क्षमता, समस्या सुलझाने की कला और लगातार नए हुनर सीखना ही सबसे जरूरी कौशल होंगे। टेक दिग्गजों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि युवा AI टूल्स का इस्तेमाल नहीं सीखेंगे, तो तकनीक उन पर हावी हो जाएगी। संजीव भिखचंदानी जैसे दिग्गजों ने सलाह दी है कि युवाओं को अगले तीन महीनों में कम से कम तीन AI प्लेटफॉर्म्स सीखने का लक्ष्य रखना चाहिए ताकि वे मार्केट में प्रासंगिक बने रह सकें।
“50% नौकरियां बदलेंगी, उतनी ही नई पैदा होंगी” – विनीत नायर संपर्क के संस्थापक अध्यक्ष ने एक महत्वपूर्ण आंकड़ा साझा करते हुए कहा कि भले ही मौजूदा 50% नौकरियां कम हो सकती हैं, लेकिन उतनी ही नई नौकरियां भी पैदा होंगी। जरूरत बस इस बात की है कि हम यह पहचानें कि हमारे क्षेत्र में किन नई स्किल्स की मांग बढ़ रही है।