चंबा: हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने शनिवार को चंबा जिले के भरमौर, मणिमहेश और अन्य आपदा प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण किया। इसके साथ ही, उन्होंने कांगड़ा जिले में पौंग बांध से छोड़े गए पानी के कारण बाढ़ प्रभावित फतेहपुर और इंदौरा के मंड क्षेत्र का भी जायजा लिया।

इस बार नुकसान ज्यादा, जान-माल की हानि कम
पठानकोट एयरफोर्स स्टेशन से मुख्यमंत्री भरमौर के लिए रवाना हुए, लेकिन खराब मौसम के कारण उनका हेलीकॉप्टर उतर नहीं पाया। इसके बाद, चंबा में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा समय पर उठाए गए कदमों के कारण 2023 की तुलना में इस बार जान-माल का नुकसान कम हुआ है, लेकिन बाढ़ से हुई तबाही का पैमाना कहीं अधिक है। सड़क, बिजली, पानी और संचार सेवाएं 2023 की तुलना में अधिक प्रभावित हुई हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार के सामने लोगों के पुनर्वास की बड़ी चुनौती है। उन्होंने वादा किया कि आपदा प्रभावित प्रत्येक परिवार को विशेष राहत पैकेज दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया, राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी और लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह लगातार जमीनी स्तर पर स्थिति की निगरानी कर रहे हैं।
‘भाजपा नेता अफवाह फैला रहे’
इस दौरान, मुख्यमंत्री ने भाजपा नेताओं पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि विपक्ष प्रभावित लोगों की मदद करने के बजाय अफवाहें फैलाने में लगा है। उन्होंने भाजपा की आलोचना करते हुए कहा कि वे विधानसभा का मानसून सत्र स्थगित करने की मांग कर रहे हैं, जबकि 2023 में यही पार्टी सत्र बढ़ाने की मांग कर रही थी।
मुख्यमंत्री ने मणिमहेश यात्रा को स्थगित करने पर हो रही राजनीति को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि यह निर्णय मौजूदा मौसम की परिस्थितियों को देखते हुए लिया गया है, लेकिन कुछ लोग इस पर भी राजनीति कर रहे हैं।
राहत कार्यों में तेजी लाने के निर्देश
मुख्यमंत्री ने चंबा के करियां स्थित एनएचपीसी भवन में जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ बैठक की। उन्होंने फंसे हुए लोगों के लिए भोजन, पानी, आश्रय और अन्य आवश्यक सुविधाओं की पर्याप्त व्यवस्था करने के निर्देश दिए। साथ ही, उन्होंने क्षतिग्रस्त सड़कों को प्राथमिकता पर खोलने, विशेषकर चंबा-भरमौर एनएच-154ए को बहाल करने और बिजली व पेयजल आपूर्ति को तुरंत शुरू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि खराब मौसम के बावजूद राहत और पुनर्वास कार्यों को युद्धस्तर पर चलाया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कलसुंई क्षेत्र का भी दौरा किया और श्रद्धालुओं से बातचीत की। उन्होंने बताया कि वहां से श्रद्धालुओं को नूरपुर और पठानकोट भेजने के लिए बसों की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा, जम्मू-कश्मीर से आए श्रद्धालुओं के लिए भी छोटे वाहनों की व्यवस्था की गई है।
बादल फटने की घटनाओं पर अध्ययन की अपील
मुख्यमंत्री ने राज्य में बार-बार हो रही बादल फटने की घटनाओं के कारणों का अध्ययन करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री के साथ हुई बैठक में उन्होंने केंद्र सरकार से इस विषय पर एक विशेषज्ञ समिति गठित करने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन एक बड़ी चुनौती है और इसका स्थायी समाधान खोजना बहुत जरूरी है।