नाहन : हिमाचल प्रदेश स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड (HPSEB) एक तरफ डिजिटल इंडिया के दौर में अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर उपभोक्ताओं को 24 घंटे निर्बाध बिजली (24×7 Reliable Power) देने का दम भर रहा है, वहीं दूसरी तरफ विद्युत उपमंडल ददाहू के अधिकारी इन दावों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। ददाहू में अधिकारियों ने अपने ही ‘रूल-रेगुलेशन’ बना लिए हैं, जिसके तहत शाम 5 बजे के बाद किसी भी तरह के बिजली फॉल्ट को ठीक नहीं किया जा रहा है। उपभोक्ताओं को दो टूक कहा जा रहा है कि चाहे पूरी रात अंधेरे में कट जाए, लेकिन बिजली अब अगले दिन सुबह 9 बजे के बाद ही बहाल होगी।
वेबसाइट पर ‘विजन’, दफ्तर में ‘विभाजन’
HPSEB की वेबसाइट (hpseb.in) पर बोर्ड का विजन स्पष्ट रूप से “Provide 24×7 reliable and quality power supply” और “100% Rural Electrification Infrastructure” दर्ज है। वेबसाइट के अनुसार, उपभोक्ता सेवा बोर्ड की सर्वोच्च प्राथमिकता है। लेकिन ददाहू उपमंडल में इसके ठीक उलट स्थिति है। यहाँ एलटी लाइन जैसे छोटे फॉल्ट के लिए भी ग्रामीणों को रात-रात भर मोमबत्तियों के सहारे रहना पड़ रहा है। विभाग के कनिष्ठ अभियंता (JE) उपभोक्ताओं को नियमों का हवाला देकर पल्ला झाड़ रहे हैं, जबकि बोर्ड के नियमों में ऐसा कोई प्रावधान ही नहीं है जो रात को सेवा देने से रोकता हो।

उपभोक्ताओं का आरोप: जेई का व्यवहार अड़ियल, शिकायत नंबर ‘ठप’
क्षेत्र के दर्जनों उपभोक्ताओं का कहना है कि ददाहू विद्युत उपमंडल का शिकायत नंबर अक्सर ‘आउट ऑफ ऑर्डर’ रहता है। ग्रामीणों को कई किलोमीटर दूर से पैदल चलकर दफ्तर आकर अपनी शिकायतें दर्ज करवानी पड़ रही हैं। उपभोक्ताओं ने आरोप लगाया कि संबंधित कनिष्ठ अभियंता (JE) का व्यवहार बेहद खराब है। वे न केवल उपभोक्ताओं के फोन उठाने से परहेज करते हैं, बल्कि समस्या लेकर आने वालों को उच्च स्तर पर शिकायत करने की चुनौती भी देते हैं।
क्या कहता है ‘कंज्यूमर चार्टर’ और नियम?
HPSEB के ‘स्टैंडर्ड ऑफ परफॉरमेंस’ (SoP) के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में फ्यूज उड़ने या लाइन फॉल्ट जैसी शिकायतों को अधिकतम 12 घंटों के भीतर ठीक करना अनिवार्य है। यह एक ‘अनिवार्य सेवा’ (Essential Service) है, जिसे समय की पाबंदियों में नहीं बांधा जा सकता। 9 से 5 का समय केवल प्रशासनिक कार्यों के लिए होता है, न कि बिजली बहाली जैसी इमरजेंसी सेवाओं के लिए।
जवाब-तलब की तैयारी: SE ने दी कड़ी चेतावनी
इस पूरे प्रकरण पर अधीक्षण अभियंता (SE) सिरमौर, वीरेन्द्र शर्मा ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विद्युत सेवाएं 24×7 की श्रेणी में आती हैं और इन्हें किसी भी समय दुरुस्त करना स्टाफ की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा, “9 से 5 का कोई भी नियम उपभोक्ताओं की सुविधा से ऊपर नहीं है। संबंधित जेई के खिलाफ पहले भी व्यवहार संबंधी शिकायतें आई हैं, इस मामले में उनसे लिखित जवाब मांगा जाएगा।”
एक तरफ सरकार बिजली उपभोक्ताओं को राजा बताती है, वहीं ददाहू के ये ‘नियम’ ग्रामीणों को ‘लालटेन युग’ में धकेल रहे हैं। अब देखना यह होगा कि विभाग अपने ‘विजन डॉक्यूमेंट’ के वादों को जमीन पर उतारता है या उपभोक्ताओं को ऐसे ही ‘स्व-निर्मित’ नियमों का शिकार होना पड़ेगा।