नाहन : नेशनल हाईवे 707 (पैकेज-2) के निर्माण में एनएचएआई (NHAI) और निजी कंपनी आरजीवी (RGV) की कार्यप्रणाली भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों के घेरे में आ गई है। ताजा मामला कफोटा बाजार का है, जहाँ भूमाफियाओं के साथ मिलीभगत कर जलशक्ति विभाग की सरकारी सड़क को ही अस्तित्व से मिटा दिया गया। मामला तूल पकड़ते ही विभाग ने कड़ा संज्ञान लेते हुए कंपनी और भूमाफियाओं के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज करवाने की तैयारी कर ली है।
जानकारी के अनुसार, जलशक्ति विभाग ने कई वर्ष पहले लोगों की निजी भूमि खरीदकर अपने कार्यालय तक सड़क बनाई थी, जिसका मुआवजा भी सरकार द्वारा दिया जा चुका है। लेकिन एनएच की कटिंग के दौरान निजी कंपनी और स्थानीय भूमाफिया ने विभाग की अनुमति के बिना ही सड़क को काट दिया। हद तो तब हो गई जब सड़क की जगह पर अतिक्रमण कर बहुमंजिला मकान खड़ा कर दिया गया। आरोप है कि एनएचएआई ने इस अवैध कार्य को न केवल अनदेखा किया, बल्कि कंपनी के बिल भी पास कर दिए।

गलत कटिंग और सड़क गायब होने से अब जलशक्ति विभाग के मुख्य भवन को भी खतरा पैदा हो गया है। स्थानीय सामाजिक संगठनों और मीडिया के हस्तक्षेप के बाद विभाग की नींद टूटी है। सामाजिक कार्यकर्ता नाथूराम चौहान ने रोष प्रकट करते हुए कहा कि प्रशासन और सरकार इस बड़े भ्रष्टाचार पर आंखें मूंद कर बैठे हैं। उन्होंने इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
शिलाई जलशक्ति विभाग के अधिशासी अभियंता (XEN) प्रदीप चौहान ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि सड़क काटने का मामला उनके संज्ञान में आया है। उन्होंने कहा, “सड़क की कटिंग के लिए न तो कोई अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) लिया गया और न ही मुआवजा दिया गया। कफोटा के एसडीओ को निर्देश दिए गए हैं कि कंपनी के खिलाफ पुलिस में एफआईआर दर्ज करवाई जाए। फिलहाल विवादित हिस्से की डिमार्केशन (निशानदेही) की मांग की गई है, जिसके बाद आगामी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।”