नाहन : हिमाचल प्रदेश के जिला सिरमौर में बैंकिंग सेक्टर से एक बड़ा बदलाव सामने आ रहा है, जहाँ आरबीआई से जुड़े सबसे बड़े बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) में नकदी की आवक काफी कम हो गई है। यह कैश शॉर्टेज किसी तकनीकी खराबी या सिस्टम की चूक की वजह से नहीं है, बल्कि सरकार और आरबीआई के उस बड़े निर्णय के तहत हो रही है जिसके तहत डिजिटल अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) को बढ़ावा दिया जा रहा है। अब फिजिकल कैश के बजाय डिजिटल टोकन प्रणाली पर अधिक जोर दिया जा रहा है, जिसका असर प्रदेश के करेंसी चेस्ट पर दिखना शुरू हो गया है।
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की चेस्ट से जुड़े अन्य बैंकों को पिछले छह महीनों से लगातार नकदी की कमी का सामना करना पड़ रहा है। जिला सिरमौर की बात करें तो यहाँ के दो सबसे बड़े व्यापारिक केंद्रों, नाहन और पांवटा साहिब में अन्य बैंक अपनी नकदी की जरूरतों के लिए एसबीआई की चेस्ट पर निर्भर हैं। मगर आरबीआई की ओर से ही नकदी की सप्लाई सीमित कर दी गई है, जिसके चलते मांग के मुकाबले बैंकों को पूरी मात्रा में नकदी उपलब्ध नहीं हो पा रही है।

एसबीआई के मुख्य प्रबंधक बसंत कुमार नेगी ने इस स्थिति की पुष्टि करते हुए बताया कि पिछले छह महीनों के दौरान एसबीआई की चेस्ट से नकदी की आवक में 50 से लेकर 80 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल बैंक इस कमी को अपने स्तर पर प्रबंधित कर रहे हैं, इसलिए आम खाताधारकों को अभी तक नकदी की किल्लत का अहसास नहीं हो पा रहा है। हालांकि, बैंक अब धीरे-धीरे अपनी प्रणाली को पूरी तरह डिजिटल नकदी की ओर मोड रहे हैं।
मुख्य प्रबंधक के अनुसार, सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) सुरक्षा के लिहाज से बेहद उपयोगी साबित होगी और इससे नकदी के प्रबंधन में होने वाली जटिलताओं से भी छुटकारा मिलेगा। आरबीआई से जुड़े बैंकों में आई यह कैश शॉर्टेज आने वाले दिनों में और बढ़ सकती है क्योंकि सरकार का लक्ष्य है कि अगले एक साल के भीतर डिजिटल करेंसी प्रणाली पूरी तरह से व्यवहार में आ जाए। भविष्य में ग्राहकों को भौतिक नोटों के बजाय डिजिटल वॉलेट के माध्यम से लेनदेन करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।