नाहन : ऐतिहासिक शहर में इन दिनों नागरिक सुविधाओं और मूलभूत व्यवस्थाओं का बुरा हाल है। शहर के मुख्य मार्गों से लेकर गली-मोहल्लों तक सड़कें पूरी तरह से टूट-फूट का शिकार हो चुकी हैं, जिससे पैदल चलने वालों और वाहन चालकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
सड़कों की खस्ताहाली के साथ-साथ शहर में जगह-जगह बिखरे कूड़े के ढेर, आवारा पशु और बंदरों का आतंक लोगों के लिए रोजमर्रा की मुसीबत बन चुका है।

विशेषकर शहर के ऐतिहासिक कालीस्थान तालाब के समीप स्थित परिसर वर्षों से उपेक्षा का शिकार है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि सालों से न तो यहां का डंगा ठीक करवाया गया है और न ही तालाब के आसपास कूड़ा फेंकना बंद हुआ है। इसके अलावा, परिसर में आम जनता और वरिष्ठ नागरिकों के बैठने के लिए बेंच तक की व्यवस्था नहीं है।
सामाजिक संस्था ‘ड्रॉप्स ऑफ होप’ के अध्यक्ष ईशान राव ने इस विषय पर जानकारी देते हुए बताया कि उन्होंने नगरपालिका को कालीस्थान तालाब परिसर में बेंच लगाने और व्यवस्था सुधारने के संबंध में पत्र सौंपा था। उस समय नगरपालिका प्रशासन द्वारा यह आश्वासन दिया गया था कि मामला हाउस (नगरपालिका बैठक) में पास हो चुका है और जल्द ही बेंच लगा दिए जाएंगे।
हालांकि, लंबा समय बीत जाने और नाहन में नई नगर परिषद (नगरपालिका) का गठन हो जाने के बावजूद धरातल पर स्थिति जस की तस बनी हुई है। न तो वहां बेंच लगाए गए और न ही डंगे की मरम्मत की ओर कोई ध्यान दिया गया। स्थानीय लोगों ने नगर परिषद प्रशासन से मांग की है कि शहर की सड़कों, सफाई व्यवस्था और कालीस्थान तालाब परिसर के सौंदर्यकरण पर तुरंत ध्यान देकर समस्याओं का समाधान किया जाए।