कंडाघाट में किसानों को दिया गया कीटनाशकों के सुरक्षित उपयोग का प्रशिक्षण

Photo of author

By Hills Post

सोलन: डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी के अंतर्गत कंडाघाट स्थित कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), सोलन ने आज किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण जागरूकता-सह-प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया। हिंदुस्तान इंसेक्टिसाइड्स लिमिटेड (HIL) के विशेष सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को कीटनाशकों के सुरक्षित व विवेकपूर्ण उपयोग और एकीकृत कीट प्रबंधन (IPM) के प्रति जागरूक करना था। इस शिविर में सोलन जिले के लगभग 200 किसानों और कृषि हितधारकों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।

भारत सरकार के रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के अधीन कार्यरत हिंदुस्तान इंसेक्टिसाइड्स लिमिटेड के अतिरिक्त महाप्रबंधक डॉ. राजेंद्र थापर ने इस कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। उन्होंने किसानों को संबोधित करते हुए कृषि रसायनों के जिम्मेदार उपयोग पर विशेष बल दिया। डॉ. थापर ने किसानों को स्पष्ट सलाह दी कि वे बाजार से कोई भी कीटनाशक खरीदते समय उसके लेबल पर दिए गए निर्देशों को अवश्य पढ़ें। प्रशिक्षण का मुख्य आकर्षण कीटनाशक सुरक्षा उपायों पर दिखाई गई एक विशेष वीडियो प्रस्तुति और सुरक्षा किट का सीधा प्रदर्शन रहा, जिसे डॉ. थापर और केईसी एग्रीटेक प्राइवेट लिमिटेड (दिल्ली) के अशोक कुमार जरवाल द्वारा प्रस्तुत किया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत तकनीकी सहायक पूजा ठाकुर द्वारा अतिथियों और किसानों के स्वागत के साथ हुई। इसके पश्चात विश्वविद्यालय के विभिन्न विषय विशेषज्ञों ने तकनीकी सत्रों के माध्यम से किसानों का मार्गदर्शन किया। कीट वैज्ञानिक डॉ. अनुराग शर्मा और डॉ. अजय शर्मा ने आवश्यकता-आधारित व फसल-विशिष्ट कीटनाशकों के उपयोग, गैर-रासायनिक कीट प्रबंधन विधियों, प्राथमिक उपचार, सुरक्षा उपकरणों के प्रयोग और रसायनों के सुरक्षित भंडारण के बारे में विस्तार से बताया।

वहीं, मृदा वैज्ञानिक डॉ. मीरा देवी ने रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों के प्रति आगाह किया और मिट्टी में जैविक कार्बन को बढ़ाने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन की आवश्यकता पर जोर दिया। इसके अतिरिक्त, वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. मानसी शर्मा ने पशुधन का वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन करने के तरीकों और किसानों के लिए उपलब्ध विभिन्न सरकारी वित्तीय योजनाओं की विस्तृत जानकारी प्रदान की।

कार्यक्रम के अंतिम चरण में एक विशेष संवादात्मक सत्र का आयोजन किया गया। इस दौरान किसानों को कृषि से जुड़ी अपनी स्थानीय और क्षेत्रीय समस्याओं को विशेषज्ञों के सामने रखने का मौका मिला। विशेषज्ञों ने मौके पर ही उनकी शंकाओं का समाधान किया, जिससे किसानों ने टिकाऊ, पर्यावरण अनुकूल और आर्थिक रूप से लाभकारी कृषि पद्धतियों के बारे में व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त किया।

Photo of author

Hills Post

हम उन लोगों और विषयों के बारे में लिखने और आवाज़ बुलंद करने का प्रयास करते हैं जिन्हे मुख्यधारा के मीडिया में कम प्राथमिकता मिलती है ।