शिमला: हिमाचल प्रदेश राज्य कर्मचारी महासंघ के प्रदेशाध्यक्ष एवं टेट प्रभावित शिक्षक मोर्चा हिमाचल प्रदेश के अध्यक्ष नरेश ठाकुर के नेतृत्व में टेट प्रभावित शिक्षकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने नेता प्रतिपक्ष को ज्ञापन सौंपते हुए Teacher Eligibility Test से जुड़े शिक्षकों की गंभीर समस्याओं और उनके सामने आ रही कठिनाइयों से विस्तार से अवगत करवाया।

लगभग 8 हजार शिक्षकों के भविष्य का है मामला
प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे नरेश ठाकुर ने कहा कि टेट का यह गंभीर मुद्दा अकेले हिमाचल प्रदेश के लगभग 8 हजार अध्यापकों तथा देश भर के करीब 20 से 25 लाख शिक्षकों के भविष्य से जुड़ा हुआ है। बड़ी संख्या में ऐसे शिक्षक हैं जो पिछले 30 से 35 वर्षों से शिक्षा विभाग में अपनी निष्ठावान सेवाएं दे रहे हैं। लंबे समय तक विद्यार्थियों को शिक्षित करने और तमाम विभागीय जिम्मेदारियों का सफलतापूर्वक निर्वहन करने के बाद अब अचानक टेट की अनिवार्यता लागू होने के कारण इन वरिष्ठ शिक्षकों और उनके परिवारों में गहरी असुरक्षा और चिंता का माहौल बना हुआ है।
केंद्र सरकार से अध्यादेश लाने का आग्रह
बैठक के दौरान ज्वाइंट टीचर्स फ्रंट के राष्ट्रीय महासचिव हितेंद्र साहसी ने पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के समक्ष जोरदार मांग रखते हुए कहा कि लंबे समय से अपनी सेवाएं दे रहे इन शिक्षकों के भविष्य और नौकरी की सुरक्षा को पूरी गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि जिन शिक्षकों की नियुक्तियां शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE Act 2009, जिसे अगस्त 2011 में लागू किया गया था) से पहले हुई थीं, उनके मामलों को एक अलग और सहानुभूतिपूर्ण दृष्टिकोण से देखा जाना बेहद आवश्यक है।
प्रतिनिधिमंडल ने नेता प्रतिपक्ष से आग्रह किया कि वे इस मामले में अपना सहयोग दें तथा केंद्र सरकार से आवश्यक हस्तक्षेप करते हुए एक विशेष अध्यादेश लाने की मांग करें, ताकि आरटीई अधिनियम लागू होने से पहले नियुक्त किए गए शिक्षकों को टेट की अनिवार्यता से उचित राहत या छूट प्रदान की जा सके। इससे वर्षों से अपनी सेवाएं दे रहे मेहनतकश अध्यापकों के साथ न्याय हो सकेगा और उनकी आजीविका व नौकरी पर मंडरा रहा संकट टल जाएगा।
हजारों परिवारों और शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा है सरोकार
मोर्चा के सदस्यों ने कहा कि यह केवल कुछ शिक्षकों का व्यक्तिगत मामला नहीं है, बल्कि इससे हजारों परिवारों का भरण-पोषण और हमारी पूरी शिक्षा व्यवस्था का भविष्य जुड़ा हुआ है। प्रतिनिधिमंडल ने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार शिक्षकों की इस लंबे समय से चली आ रही मांग पर पूरी सकारात्मकता के साथ विचार करेगी और उनके हितों की रक्षा के लिए ठोस निर्णय लेगी। मोर्चा ने स्पष्ट किया कि शिक्षक अपने सम्मान, सेवा सुरक्षा और न्याय की इस मांग को आगे भी पूरी तरह लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से उठाते रहेंगे।
प्रतिनिधिमंडल में ये गणमान्य लोग रहे शामिल
इस प्रतिनिधिमंडल में हिमाचल प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ के पूर्व राज्य अध्यक्ष हेम राज ठाकुर, टेट प्रभावित शिक्षक मोर्चा हिमाचल के वरिष्ठ उपाध्यक्ष हरमेश लाल शर्मा, मुख्य सलाहकार हम राज धीमान व जालम सिंह यादव, जिला मंडी के अध्यक्ष कश्मीर ठाकुर, कोषाध्यक्ष नेत्र सिंह, खंड नगर के अध्यक्ष दिनेश कुमार, हिमाचल प्रदेश राज्य कर्मचारी महासंघ के उपाध्यक्ष जगदीश राणा, राज्य सदस्य विजय कुमार, राज्य प्रेस सचिव पंकज कुमार, जिला मंडी के अध्यक्ष हेत राम शर्मा तथा वरिष्ठ उपाध्यक्ष हेमंत ठाकुर सहित कई अन्य प्रमुख शिक्षक नेता और प्रतिनिधि उपस्थित रहे।