नाहन : एक समय था, जब हिमाचल प्रदेश पथ परिवहन निगम (HRTC) का नाहन डिपो राज्य के प्रमुख और बेहतर प्रदर्शन करने वाले डिपो में शुमार होता था। नाहन डिपो को निगम का ‘कमाऊ पूत’ तक कहा जाता था, लेकिन समय के साथ इसकी स्थिति लगातार कमजोर होती गई। मौजूदा हालात यह हैं कि डिपो के अपने बस स्टैंड स्थित डीजल पंप में ही ईंधन खत्म हो गया और बसों को निजी पंप से डीजल भरवाने की नौबत आ गई।
ताजा घटनाक्रम में नाहन बस स्टैंड स्थित एचआरटीसी के डीजल पंप के ड्राई होने की सूचना सामने आई है। इसके बाद आनन-फानन में बस अड्डा प्रबंधन को निजी पेट्रोल पंप से निगम की बसों में डीजल डलवाना पड़ा। बताया जा रहा है कि इससे पहले पांवटा साहिब में भी इसी तरह की स्थिति पैदा हुई थी। जानकारी के अनुसार, बस स्टैंड का डीजल पंप वीरवार शाम तक ड्राई रह सकता है।

नाहन डिपो प्रदेश के सबसे पुराने डिपो में शामिल है। ऐसे में डीजल जैसी मूलभूत व्यवस्था का प्रभावित होना निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। नाहन डिपो से लंबे बस रूट प्रभावित होने और कुछ सेवाएं बंद होने की आशंकाएं पहले भी जताई जाती रही हैं। हाल ही में दिल्ली रूट को बंद करने को लेकर भी खासा विवाद हुआ था, जिसके बाद इस बस सेवा को बहाल किया गया।
डीजल की किल्लत के कारण कुछ बस रूट प्रभावित होने की भी खबर है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जब आरएम का अतिरिक्त कार्यभार संभाल रहे प्रदीप ठाकुर से बात की गई, तो उन्होंने बताया कि समस्या को हल कर लिया गया है और कल तक नया टैंकर पहुंच जाएगा। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि ईंधन का यह संकट आखिर क्यों पैदा हुआ। उन्होंने केवल इतना कहा कि पंप में अभी भी थोड़ा तेल बचा हुआ है, लेकिन तकनीकी कारणों से इसे पूरी तरह खाली नहीं किया जा सकता, वरना सिस्टम में एयर (हवा) आने का खतरा रहता है।
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि नाहन जैसे पुराने और महत्वपूर्ण डिपो में डीजल जैसी जरूरी व्यवस्था आखिर क्यों चरमराई और यात्रियों को इसका खामियाजा कब तक भुगतना पड़ेगा?