नाहन : समाज में अक्सर यह धारणा देखी जाती है कि रसूखदार और ऊंचे पदों पर बैठे लोग अपने बच्चों को महंगे निजी स्कूलों में पढ़ाना पसंद करते हैं। लेकिन नाहन में हाल ही में पदभार संभालने वाले नायब तहसीलदार (चुनाव) राजेश ठाकुर ने इस धारणा को तोड़ते हुए एक प्रेरक उदाहरण पेश किया है। मूल रूप से मंडी जिले के सरकाघाट (धर्मपुर) के रहने वाले राजेश ठाकुर ने नाहन में अपनी ज्वाइनिंग के साथ ही अपनी तीनों बेटियों का दाखिला स्थानीय सरकारी स्कूल में करवाया है।
राजेश ठाकुर हाल ही में बैजनाथ से स्थानांतरित होकर नाहन आए हैं और उन्होंने 7 अप्रैल को ही यहाँ नायब तहसीलदार (चुनाव) के रूप में पदभार संभाला है। कार्यभार संभालने के तुरंत बाद उन्होंने अपनी बेटियों की शिक्षा के लिए सरकारी संस्थान को चुना। उन्होंने अपनी बड़ी बेटी सानवी ठाकुर का दाखिला पीएमश्री राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला नाहन में 9वीं कक्षा में और दूसरी बेटी शैवी ठाकुर का दाखिला इसी स्कूल की 6वीं कक्षा में करवाया है। वहीं, अपनी सबसे छोटी बेटी यशविता ठाकुर का दाखिला उन्होंने सरकारी प्राथमिक पाठशाला (कन्या) में पहली कक्षा में कराया है।

एक साधारण और मध्यमवर्गीय पृष्ठभूमि से संबंध रखने वाले राजेश ठाकुर की पत्नी एक गृहिणी (Housewife) हैं। राजेश ठाकुर का मानना है कि सरकारी स्कूलों के अध्यापक उच्च शिक्षित और बेहद अनुभवी होते हैं। उन्होंने कहा, “मेरा शुरू से ही यह मानना रहा है कि यदि अभिभावकों और शिक्षकों के बीच बेहतर तालमेल और संवाद हो, तो सरकारी स्कूलों से बेहतर विकल्प कोई दूसरा नहीं हो सकता।”
गौरतलब है कि नाहन का यह कन्या स्कूल अब सीबीएसई (CBSE) बोर्ड से संबद्ध हो चुका है और ‘पीएमश्री’ योजना के तहत यहाँ सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। स्कूल के आधुनिक ढांचे और बेहतर परिणाम के चलते यहाँ दाखिलों का ग्राफ तेजी से बढ़ा है। ऐसे में एक प्रशासनिक अधिकारी द्वारा अपनी बेटियों को यहाँ पढ़ाने का निर्णय लेना सरकारी शिक्षा प्रणाली पर जनता के विश्वास को और अधिक मजबूत करेगा। यह कदम उन अभिभावकों के लिए एक बड़ी प्रेरणा है जो केवल ‘स्टेटस सिंबल’ के लिए निजी स्कूलों की ओर भागते हैं।