नाहन: जिला सिरमौर का सबसे बड़ा स्वास्थ्य संस्थान डॉ. यशवंत सिंह परमार मेडिकल कॉलेज इन दिनों खुद ‘बीमार’ नजर आ रहा है। अस्पताल में मरीजों की तादाद तो लगातार बढ़ रही है, लेकिन उन्हें उपचार देने वाले डॉक्टरों, स्टाफ और आधुनिक उपकरणों की भारी कमी खल रही है। आलम यह है कि दूर-दराज के इलाकों से आने वाले मरीज सुबह से शाम तक ओपीडी के बाहर अपनी बारी का इंतजार करने को मजबूर हैं।
अस्पताल में अव्यवस्था का आलम यह है कि गंभीर रूप से बीमार मरीजों को भी समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा है। एक तीमारदार ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा, “मेरे पिता की हालत बेहद खराब है, वे ठीक से खड़े भी नहीं हो पा रहे। हम सुबह 9 बजे से लाइन में लगे हैं, 20 चक्कर काट चुके हैं लेकिन दोपहर बाद तक हमारा 34वां नंबर नहीं आया।” वहीं, एक अन्य महिला मरीज ने बताया कि वह आंखों में मोतियाबिंद की समस्या लेकर सुबह से भूखी-प्यासी बैठी हैं, लेकिन शाम 4 बजे तक भी उनकी जांच नहीं हो सकी। कई मरीज तो सिर्फ अपनी लैब रिपोर्ट दिखाने के लिए ही पूरा दिन कतारों में गुजार रहे हैं।

इस गंभीर स्थिति पर मेडिकल कॉलेज की चिकित्सा अधीक्षक डॉ. रेणु चौहान ने स्वीकार किया कि संस्थान में चिकित्सकों की कमी एक बड़ी और निरंतर बनी रहने वाली समस्या है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मेडिकल कॉलेज के लगभग सभी विभागों में डॉक्टरों के पद खाली पड़े हुए हैं, जिसके बारे में सरकार को पहले ही लिखित रूप में अवगत करवाया जा चुका है।
डॉ. रेणु चौहान ने आज की अव्यवस्था का कारण बताते हुए कहा कि बीते कल अवकाश था और आने वाले दो दिनों में फिर सरकारी छुट्टियां हैं। इस कारण कुछ डॉक्टर अवकाश पर चल रहे हैं, जिसकी वजह से विशेषकर मेडिसिन विभाग में मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा है।
मरीजों का कहना है कि डॉक्टरों की कमी के साथ-साथ अस्पताल में आधुनिक मशीनों और तकनीकी संसाधनों की भी भारी किल्लत है। बिना पर्याप्त स्टाफ और उपकरणों के यह मेडिकल कॉलेज महज एक रेफरल सेंटर बनकर रह गया है।