सोलन: डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी के पुष्प विज्ञान एवं भू-दृश्य वास्तुकला विभाग द्वारा सोलन जिले की सुल्तानपुर ग्राम पंचायत में कट एवं गमले में उगाए जाने वाले फूल विषय पर एक दिवसीय विशेष प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY) के अंतर्गत अनुसूचित जाति उप-योजना (SCSP) के तहत आयोजित किया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य स्थानीय किसानों को पुष्प उत्पादन की व्यावहारिक जानकारी देने के साथ-साथ कृषि क्षेत्र में इसकी आय-सृजन की संभावनाओं से अवगत कराना था। इस प्रशिक्षण शिविर में लगभग 70 प्रगतिशील किसानों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

विधायक विनोद सुल्तानपुरी के विचार और घोषणा
इस अवसर पर कसौली के विधायक एवं विश्वविद्यालय सीनेट के सदस्य विनोद सुल्तानपुरी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने किसानों को बहुमूल्य तकनीकी जानकारी प्रदान करने के लिए विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों के प्रयासों की भूरी-भूरी सराहना की। उन्होंने कहा कि आधुनिक पुष्प उत्पादन किसानों की पारंपरिक आय को बढ़ाने के साथ-साथ उन्हें आजीविका के अतिरिक्त और बेहतरीन अवसर उपलब्ध करवाने की मजबूत क्षमता रखता है। उन्होंने किसानों को उन्नत तकनीकों को अपनाने तथा उचित तकनीकी मार्गदर्शन के लिए कृषि व बागवानी विशेषज्ञों के साथ हमेशा नियमित संपर्क बनाए रखने की सलाह दी।
किसानों के व्यावहारिक ज्ञान को और बढ़ाने के लिए मुख्य अतिथि ने सुल्तानपुर पंचायत के 30 से 40 किसानों के एक विशेष समूह को विश्वविद्यालय के परिसरों का भ्रमण करने तथा प्रायोजित प्रशिक्षण प्राप्त करने का प्रस्ताव रखा, ताकि किसान पुष्प उत्पादन की आधुनिक तकनीकों का प्रत्यक्ष रूप से अनुभव ले सकें।
वैज्ञानिकों द्वारा दी गई तकनीकी जानकारी
पुष्प विज्ञान एवं भू-दृश्य वास्तुकला विभाग के विशेषज्ञ वैज्ञानिकों प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. बी.एस. डील्टा, डॉ. भारती कश्यप, डॉ. पूजा शर्मा और डॉ. अर्शी ने किसानों को कट, लूस (खुले) तथा गमले में उगाए जाने वाले फूलों के उत्पादन के विभिन्न तकनीकी पहलुओं की विस्तृत जानकारी दी।
प्रशिक्षण के दौरान किसानों को गुलदाउदी, गुलाब, बर्ड ऑफ पैराडाइज, लिलियम, हाइड्रेंजिया, ग्लैडियोलस तथा ऑर्किड जैसे प्रमुख कट फूलों के साथ-साथ गेंदा एवं अन्य लूस फूलों की आधुनिक उत्पादन तकनीकों और उनके व्यावसायिक महत्व के बारे में बताया गया। वैज्ञानिकों ने समझाया कि पुष्प उत्पादन को अपनाकर किसान अपनी फसल विविधता को बढ़ाकर अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं।
गमले वाले पौधे, सौंदर्यीकरण और पर्यावरण संरक्षण:
प्रतिभागियों को विभिन्न प्रकार के गमले वाले पौधों, ग्रोइंग मीडिया तथा उनके उचित प्रबंधन के बारे में भी प्रायोगिक जानकारी दी गई। इसके अलावा, घरों, शैक्षणिक संस्थानों व अन्य सार्वजनिक स्थलों के सौंदर्यीकरण में फूलदार और सजावटी पौधों के उपयोग तथा पर्यावरण को स्वच्छ बनाने व प्रदूषण को कम करने में पौधों की महत्वपूर्ण भूमिका पर भी विशेष चर्चा हुई।
वैज्ञानिकों ने किसानों द्वारा रोपण सामग्री, उत्पादन तकनीक, विपणन और फूलों के बाजार से जुड़े अवसरों को लेकर पूछे गए विभिन्न जिज्ञासापूर्ण प्रश्नों के संतोषजनक उत्तर दिए। किसानों को यह भी प्रोत्साहित किया गया कि वे आवश्यकता पड़ने पर तकनीकी मार्गदर्शन और रोपण सामग्री के लिए नौणी विश्वविद्यालय का दौरा करें और वैज्ञानिकों से सीधा संपर्क रखें।
गणमान्य लोगों की उपस्थिति
कार्यक्रम के अंत में डॉ. बी.एस. डील्टा ने सभी किसानों से विभाग के साथ सतत संपर्क बनाए रखने का आग्रह किया। इस अवसर पर सुल्तानपुर पंचायत के प्रधान अभिषेक सुल्तानपुरी, बोहली पंचायत के प्रधान अत्तर सिंह, पूर्व प्रधान सुनीता सुल्तानपुरी और शिव दत्त ठाकुर सहित क्षेत्र के कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।