बजट सत्र में राज्यपाल ने बीच में छोड़ा अभिभाषण, CM बोले RDG हमारा हक

Photo of author

By Hills Post

शिमला: हिमाचल प्रदेश विधानसभा का बजट सत्र सोमवार को भारी गहमागहमी और एक असामान्य घटनाक्रम के साथ शुरू हुआ। सत्र का आगाज राज्यपाल के अभिभाषण से होना था, लेकिन राज्यपाल ने सरकार द्वारा तैयार किए गए अभिभाषण को पूरा पढ़ने से साफ इनकार कर दिया। उन्होंने अभिभाषण की महज कुछ शुरुआती पंक्तियां पढ़ीं और बाकी भाषण को पढ़ा हुआ मानकर सदन के पटल पर रख दिया।

सदन के भीतर माहौल तब गरमा गया जब राज्यपाल ने अभिभाषण पढ़ते समय बीच में ही रुककर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि अभिभाषण में संवैधानिक संस्थाओं (Constitutional Institutions) को लेकर कुछ ऐसी बातें लिखी गई हैं जो मर्यादा से परे हैं। उन्होंने इन टिप्पणियों को पढ़ने से मना कर दिया और अभिभाषण की कॉपी टेबल पर रखकर अपना संबोधन समाप्त कर दिया। इस वाकये के बाद सदन में सियासी हलचल तेज हो गई।

इस पूरे घटनाक्रम पर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने मीडिया से बातचीत में कहा कि राज्यपाल द्वारा अभिभाषण छोटा करना या पूरा न पढ़ना कोई असामान्य घटना नहीं है। इतिहास में और अन्य राज्यों में भी पहले इस तरह की स्थितियां देखने को मिल चुकी हैं।

मुख्यमंत्री ने प्रदेश की आर्थिक स्थिति और केंद्र से मिलने वाली मदद पर फोकस किया। उन्होंने रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट (RDG) का मुद्दा उठाते हुए कहा कि आरडीजी हिमाचल प्रदेश का संवैधानिक अधिकार है। एक छोटे पर्वतीय राज्य होने के नाते हमें इस सहायता की सख्त जरूरत है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हम केंद्र से कोई खैरात नहीं मांग रहे, बल्कि अपने हिस्से का हक मांग रहे हैं।

मुख्यमंत्री सुक्खू ने इस मुद्दे पर राजनीति करने के बजाय विपक्ष (भाजपा) को एकजुटता का संदेश दिया। उन्होंने भाजपा विधायकों से अपील की कि वे प्रदेश के हितों की रक्षा के लिए दलगत राजनीति से ऊपर उठें। सीएम ने कहा कि मैं भाजपा विधायकों को आमंत्रित करता हूं कि वे मेरे साथ दिल्ली चलें। हम सब मिलकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे और हिमाचल के हक की आवाज उठाएंगे।

Photo of author

Hills Post

हम उन लोगों और विषयों के बारे में लिखने और आवाज़ बुलंद करने का प्रयास करते हैं जिन्हे मुख्यधारा के मीडिया में कम प्राथमिकता मिलती है ।