शिमला: हिमाचल प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के तीसरे दिन यानी बुधवार को सदन के भीतर जमकर सियासी घमासान देखने को मिला। राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) की बहाली को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई। भारी शोरगुल और विपक्ष की नारेबाजी के बीच सरकार द्वारा लाया गया आरडीजी बहाली का संकल्प ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। इस हंगामेदार सत्र के बाद विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने सदन की कार्यवाही 18 मार्च सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी है।

बीते तीन दिनों से सदन में आरडीजी पर चर्चा चल रही थी। बुधवार को जब मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू चर्चा का जवाब देने के लिए खड़े हुए, तो विपक्ष ने उन पर गलत आंकड़े पेश करने का आरोप लगाना शुरू कर दिया। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर को बीच में बोलने की अनुमति न मिलने से नाराज भाजपा विधायक अपनी सीटों से उठकर जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि कार्यवाही को 10 मिनट के लिए रोकना पड़ा। दोबारा कार्यवाही शुरू होने के बाद भी शोरगुल थमा नहीं, लेकिन इसी शोर के बीच संकल्प को पारित कर केंद्र सरकार को भेजने की मंजूरी दे दी गई।
सीएम के आक्रामक तेवर: खैरात नहीं, हमारा हक है
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में केंद्र और पूर्व की भाजपा सरकार पर तीखे हमले किए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि संविधान के अनुच्छेद 275 और 280 के तहत आरडीजी हिमाचल का संवैधानिक अधिकार है, कोई खैरात नहीं। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि पूर्व भाजपा सरकार को 54 हजार करोड़ रुपये आरडीजी और 16 हजार करोड़ रुपये जीएसटी मुआवजे के रूप में मिले, फिर भी 45 हजार करोड़ का कर्ज लिया गया। जबकि हमें आरडीजी के रूप में केवल 17 हजार करोड़ मिले हैं। जीएसटी लागू होने के बाद प्रदेश को करीब 18 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। उन्होंने दावा किया कि सुधारात्मक कदमों के चलते 48 साल बाद राज्य बिजली बोर्ड पिछले तीन वर्षों में 200 करोड़ रुपये के मुनाफे में आया है। हिमकेयर योजना पर भी उन्होंने विपक्ष को घेरा और कहा कि उनकी सरकार ने 927 करोड़ खर्च किए हैं, जबकि पूर्व सरकार ने अपने कार्यकाल में केवल 374 करोड़ खर्च किए थे।
विपक्ष को खुला ऑफर: नेतृत्व आप करें, कैबिनेट मेरे साथ होगी
मुख्यमंत्री ने विपक्ष को चुनौती देने के साथ-साथ एक बड़ा सियासी ऑफर भी दिया। उन्होंने कहा कि अगर विपक्ष वाकई प्रदेश का भला चाहता है, तो मैं अपनी पूरी कैबिनेट के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने को तैयार हूं। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर करें, हम उनके पीछे चलेंगे। सीएम ने साफ किया कि अगर एक बार यह ग्रांट बंद हो गई, तो इसे दोबारा शुरू करवाना नामुमकिन हो जाएगा, जिसका सीधा असर प्रदेश के विकास पर पड़ेगा।