शिमला: दिल्ली से लौटते ही मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने तल्ख तेवर अपना लिए हैं। उन्होंने हिमाचल की आर्थिक स्थिति और केंद्र से मिलने वाले राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) को लेकर विपक्ष पर सीधा निशाना साधा है। मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि केंद्र सरकार द्वारा आरडीजी बंद करने से हिमाचल को 2026 से 2031 तक हर साल करीब 10,000 करोड़ रुपये का बड़ा नुकसान झेलना पड़ेगा। उन्होंने बीजेपी नेताओं को नसीहत दी कि वे राज्य सरकार को कोसने के बजाय प्रधानमंत्री से मिलें और प्रदेश के लिए इस अनुदान को बहाल करवाएं।

70 हजार करोड़ का हिसाब मांगा
आंकड़ों के जरिए पूर्व सरकार को घेरते हुए सीएम सुक्खू ने कहा कि जयराम सरकार के पांच साल के कार्यकाल में केंद्र से करीब 70,000 करोड़ रुपये की मदद मिली थी। इसमें 54,000 करोड़ से ज्यादा आरडीजी और बाकी पैसा जीएसटी मुआवजे व अंतरिम राहत के तौर पर आया था। मुख्यमंत्री ने सवाल दागा कि अगर उस वक्त इसमें से 40,000 करोड़ रुपये का कर्ज चुका दिया जाता, तो आज हिमाचल कर्ज के जाल में नहीं फंसा होता। उन्होंने पूछा कि आखिर वो 70 हजार करोड़ रुपये कहां खर्च हुए और उसका फायदा किसे मिला, इसका जवाब पूर्व मुख्यमंत्री को देना चाहिए।
3800 करोड़ की एक्स्ट्रा कमाई
मुख्यमंत्री ने बताया कि उन्हें विरासत में 75,000 करोड़ का कर्ज और 10,000 करोड़ की देनदारियां मिली थीं। इसके बावजूद उनकी सरकार ने कड़े फैसले लिए और भ्रष्टाचार पर लगाम लगाई, जिससे पिछले तीन सालों में सरकारी खजाने में 3,800 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय हुई है। उन्होंने दिल्ली में पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम से भी मुलाकात की और 16वें वित्त आयोग के सामने हिमाचल का पक्ष मजबूती से रखने पर चर्चा की।
अफसरशाही में कटौती, बुजुर्गों को पेंशन
खर्चा घटाने के लिए सुक्खू सरकार ने बड़े प्रशासनिक सुधार भी किए हैं। मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि आईएएस, आईपीएस और आईएफएस कैडर के पदों में कटौती की गई है। आईएफएस अधिकारियों के पद 110 से घटाकर 86 कर दिए गए हैं। इसके अलावा कम छात्रों वाले स्कूल-कॉलेजों का विलय किया गया है। उन्होंने दावा किया कि आर्थिक तंगी के बावजूद सरकार ने 70 साल से ऊपर के बुजुर्गों और 2016-21 के बीच रिटायर हुए क्लास-4 कर्मचारियों के एरियर का भुगतान कर दिया है।
संसाधनों पर हमारा हक
मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा कि एक रिपोर्ट के मुताबिक हिमाचल देश को 90,000 करोड़ रुपये की पर्यावरणीय सेवाएं (Ecological Services) देता है। इसलिए प्रदेश के संसाधनों पर हमारा पूरा हक है और सरकार इसके लिए पूरी ताकत से लड़ाई लड़ेगी।