नाहन : हिमाचल प्रदेश के राजगढ़ क्षेत्र में पिछले लंबे समय से दहशत का पर्याय बना तेंदुआ आखिरकार वन विभाग के जाल में फंस गया है। पिछले कई दिनों से यह तेंदुआ रिहायशी इलाकों के आसपास देखा जा रहा था, जिससे स्थानीय ग्रामीणों और शहरवासियों में भारी डर का माहौल था। तेंदुए की लगातार आवाजाही और पालतू जानवरों पर हमलों की शिकायतों के बाद वन विभाग ने एक ठोस रणनीति तैयार की और क्षेत्र में पिंजरा लगाया। विभाग की सतर्कता के चलते तेंदुए को सुरक्षित तरीके से पकड़ लिया गया, जिससे क्षेत्र के लोगों ने राहत की सांस ली है।
तेंदुए को पकड़ने के तुरंत बाद पशुपालन विभाग के विशेषज्ञों और वेटनरी फार्मासिस्ट की टीम को मौके पर बुलाया गया। वन मंडल अधिकारी (DFO) समीर राज ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि तेंदुए का प्रारंभिक स्वास्थ्य परीक्षण कर लिया गया है। हालांकि वह देखने में स्वस्थ लग रहा था, लेकिन रेस्क्यू के दौरान उसे कुछ मामूली चोटें आई हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए, तेंदुए को बेहतर उपचार और निगरानी के लिए शिमला वन विभाग केंद्र भेज दिया गया है। पूर्ण रूप से स्वस्थ होने और मेडिकल क्लीयरेंस मिलने के बाद ही उसे नियमानुसार किसी गहरे सुरक्षित वन क्षेत्र में छोड़ा जाएगा।

विशेष रूप से नगर के वार्ड नंबर-5 में तेंदुए की सक्रियता ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी थी। स्थानीय निवासी प्रेम चौहान ने एक दर्दनाक घटना का विवरण देते हुए बताया कि पिछली रात तेंदुआ उनके घर की बालकनी तक पहुँच गया और वहाँ सो रही पालतू कुतिया को उठाकर ले गया। यह पिछले कुछ वर्षों में चौथी ऐसी घटना थी जब तेंदुए ने आबादी के बीच घुसकर शिकार किया। लोगों का कहना है कि तेंदुआ इतना निडर हो चुका था कि वह शाम ढलते ही घरों की छतों और गलियों में घूमने लगता था, जिससे लोग शाम के बाद घरों से बाहर निकलने में भी कतरा रहे थे।
डीएफओ समीर राज ने जनता से अपील की है कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें और जंगली जानवरों की मौजूदगी की सूचना तुरंत विभाग को दें। उन्होंने आश्वासन दिया कि विभाग भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए निगरानी और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करेगा। फिलहाल, तेंदुए के पकड़े जाने के बाद राजगढ़ के वार्ड नंबर-5 सहित आसपास के इलाकों में स्थिति सामान्य होने की उम्मीद है, लेकिन विभाग ने अभी भी लोगों को एहतियात बरतने की सलाह दी है।