शूलिनी यूनिवर्सिटी की डॉ. मोनिका और रीत साहनी ने जीता वंदना शर्मा मेमोरियल पुरस्कार 2026

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By Hills Post

सोलन: शूलिनी विश्वविद्यालय ने वंदना शर्मा मेमोरियल पुरस्कार 2026 के माध्यम से अपने परिसर की उन महिलाओं को सम्मानित किया है, जिन्होंने साहस, दृढ़ संकल्प और उत्कृष्टता की नई मिसाल पेश की है। वुमेन ऑफ सब्सटेंस कार्यक्रम के दौरान संकाय (Faculty) और छात्र समुदाय की उन महिलाओं की प्रेरक यात्राओं को साझा किया गया, जिन्होंने व्यक्तिगत और व्यावसायिक चुनौतियों को पार कर सफलता हासिल की है।

संकाय और छात्र श्रेणी के विजेताओं की कड़े चयन और प्रभावशाली कहानियों के आधार पर विजेताओं की घोषणा की गई। संकाय श्रेणी (Faculty) में फार्मास्युटिकल साइंसेज स्कूल की सहायक प्रोफेसर डॉ. मोनिका प्रकाश सिंह विजेता रहीं, जबकि बायोटेक्नोलॉजी स्कूल की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. नितिका ठाकुर ने दूसरा स्थान प्राप्त किया। वहीं छात्र श्रेणी (Student) में बी.टेक बायोटेक्नोलॉजी की छात्रा रीत साहनी को प्रथम और बीबीए एलएलबी की छात्रा शेनाया शर्मा को द्वितीय स्थान से नवाजा गया।

विजेता डॉ. मोनिका पी. सिंह ने अपनी यात्रा साझा करते हुए बताया कि कैसे उन्होंने सामाजिक अपेक्षाओं और पारिवारिक दबावों के बीच अपनी पीएचडी और शोध कार्य को पूरा किया। उन्होंने अपनी छोटी बेटी से दूर रहकर पढ़ाई करने के दौरान महसूस किए गए ‘अपराधबोध’ और संघर्षों को उजागर किया। डॉ. मोनिका ने अपना यह पुरस्कार अपनी बेटी तियाना प्रकाश सिंह को समर्पित करते हुए उसे अपनी सबसे बड़ी शक्ति बताया।

छात्र श्रेणी की विजेता रीत साहनी के संबोधन ने दर्शकों को गहराई से प्रभावित किया। उन्होंने खुद को एक Survivor के बजाय एक योद्धा (Warrior) के रूप में परिभाषित किया। उन्होंने अन्य छात्राओं को प्रेरित करते हुए कहा कि संघर्षों का सामना पूरी शक्ति और साहस के साथ करना चाहिए। वहीं उपविजेता शेनाया शर्मा ने आत्मनिर्भरता के महत्व पर बल दिया।

डॉ. नितिका ठाकुर ने महिलाओं का आह्वान किया कि वे सामाजिक मानदंडों की बेड़ियों को तोड़कर आत्मविश्वास के साथ अपनी महत्वाकांक्षाओं को पूरा करें। श्रीमती पूनम नंदा (निदेशक, सस्टेनेबिलिटी) ने कहा कि इस पुरस्कार का उद्देश्य उन महिलाओं को मंच देना है जो अपनी यात्रा में असाधारण शक्ति दिखाती हैं। आज साझा की गई प्रत्येक कहानी यह संदेश देती है कि आत्मविश्वास से चुनौतियों को अवसरों में बदला जा सकता है।

यह कार्यक्रम न केवल पुरस्कार वितरण तक सीमित रहा, बल्कि इसने परिसर की महिलाओं के बीच एकता, साहस और सशक्तिकरण की एक नई लहर पैदा की।

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