सोलन: शूलिनी यूनिवर्सिटी ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक अनूठी पहल करते हुए वर्ल्ड प्लास्टिक बैग फ्री डे के अवसर पर अपने हाउसकीपिंग, ऑपरेशन्स और लैंडस्केपिंग स्टाफ के लिए कचरा अलग करने (वेस्ट सेग्रीगेशन) पर एक इंटरैक्टिव वर्कशॉप का आयोजन किया। इस विशेष सत्र का मुख्य उद्देश्य स्टाफ को जिम्मेदारी से कचरा प्रबंधन करने और प्लास्टिक प्रदूषण से पर्यावरण को होने वाले नुकसान के बारे में व्यावहारिक (प्रैक्टिकल) जानकारी देना था।

कैंपस को पूरी तरह साफ-सुथरा और सस्टेनेबल (टिकाऊ) बनाने के गुर सीखने के लिए यूनिवर्सिटी के कुल 65 कर्मचारियों ने इस वर्कशॉप में उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया।
डॉक्यूमेंट्री और ग्रुप डिस्कशन से बढ़ी जागरूकता
वर्कशॉप की शुरुआत एक मजेदार आइसब्रेकर एक्टिविटी के साथ हुई, जिसके बाद प्लास्टिक प्रदूषण और कचरा प्रबंधन पर एक विस्तृत प्रेजेंटेशन दी गई। इस दौरान उपस्थित स्टाफ को ‘मेरा बाबा देश चलाता है’ नामक एक मर्मस्पर्शी डॉक्यूमेंट्री भी दिखाई गई। यह डॉक्यूमेंट्री समुदायों और संस्थानों को साफ व स्वस्थ रखने में सफाई कर्मचारियों के अमूल्य और अनुकरणीय योगदान को रेखांकित करती है।
इसके बाद आयोजित एक इंटरैक्टिव ग्रुप डिस्कशन में कर्मचारियों ने कैंपस के भीतर कचरा इकट्ठा करने और उसे अलग-अलग करते समय आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों को साझा किया। वर्कशॉप के फैसिलिटेटर्स के साथ मिलकर स्टाफ ने कचरा प्रबंधन के तरीकों को अधिक प्रभावी और सुगम बनाने के लिए कई बेहतरीन समाधानों पर चर्चा की।
यूनिवर्सिटी में सस्टेनेबिलिटी की डायरेक्टर श्रीमती पूनम नंदा ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि हमारी हाउसकीपिंग और ऑपरेशन्स टीमें कैंपस को स्वच्छ और पर्यावरण-अनुकूल बनाए रखने की असली रीढ़ हैं। उन्हें इस तरह की प्रैक्टिकल जानकारी और आधुनिक स्किल्स से लैस करके, हम पर्यावरण के प्रति अपनी सामूहिक प्रतिबद्धता को और अधिक मजबूत कर रहे हैं।