सोलन: शूलिनी विश्वविद्यालय में आयोजित दो दिवसीय एआईयू अन्वेषण 2025-26 राष्ट्रीय अनुसंधान सम्मेलन का सफलतापूर्वक समापन हो गया है। भारतीय विश्वविद्यालय संघ (AIU) के सहयोग से आयोजित इस प्रतिष्ठित सम्मेलन में देश भर के विश्वविद्यालयों के युवा नवप्रवर्तकों और शोधकर्ताओं ने एक साथ आकर अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया। इस आयोजन ने युवा विद्वानों के बीच रचनात्मकता, उत्कृष्ट अनुसंधान और अंतःविषयक नवाचार को बढ़ावा देने का बेहतरीन कार्य किया है।

सम्मेलन के समापन दिवस पर सामाजिक विज्ञान, स्वास्थ्य, इंजीनियरिंग, बुनियादी विज्ञान और कृषि सहित विभिन्न श्रेणियों में उत्कृष्ट अनुसंधान परियोजनाओं और नवोन्मेषी प्रोटोटाइप के लिए विजेताओं को सम्मानित किया गया। अंतिम परिणामों में सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय की टीम ‘प्रोहील’ ने सर्वोच्च सम्मान ‘डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन स्वर्ण पदक’ अपने नाम किया। अंतःविषयक श्रेणी में डेंगू डिटेक्टर, न्यूरोपल्स और रिकी जैसी परियोजनाओं को शीर्ष सम्मान प्राप्त हुए।
वहीं, सामाजिक विज्ञान में टीम बायोप्लास्टिक ने प्रथम स्थान प्राप्त किया, जिसके बाद तसुन और कैटलिस्ट का स्थान रहा। स्वास्थ्य श्रेणी में प्रोहील और माइक्रोब रेंज अग्रणी प्रविष्टियों में शामिल रहीं, जबकि इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी में एटोनोवाज़, नियो-विस्क और कुंग जैसे उल्लेखनीय नवाचार देखने को मिले। इसके अतिरिक्त, बुनियादी विज्ञान में इलेक्ट्रॉनिक एक्स, वर्डीऑनएक्स और हार्टरी को मान्यता मिली तथा कृषि क्षेत्र में टीम ज़ूफ़िलिस्ट, एग्रो-पीएफएएस बस्टर्स और एग्रीटेक फ़्यूज़न को विजेता घोषित किया गया।
समापन समारोह को संबोधित करते हुए शूलिनी विश्वविद्यालय की मुख्य शिक्षण अधिकारी डॉ. आशू खोसला ने कहा कि इस सम्मेलन ने छात्रों की रचनात्मकता और राष्ट्रीय स्तर पर अकादमिक विचारों के आदान-प्रदान के लिए एक बेहद जीवंत मंच प्रदान किया है। उन्होंने आवास, परिवहन और सुचारू व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए विश्वविद्यालय की नवाचार परिषद, संकाय समन्वयकों और स्वयंसेवकों के समर्पित प्रयासों की जमकर सराहना की। इसी कड़ी में विश्वविद्यालय के कुलाधिपति प्रो. पी. के. खोसला ने अपने समापन भाषण में युवा शोधकर्ताओं का उत्साहवर्धन करते हुए उनसे अपने विचारों पर दृढ़ विश्वास रखने का आग्रह किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि सच्चा नवाचार आत्मविश्वास, दृढ़ता और उद्देश्य की स्पष्टता से ही जन्म लेता है और छात्रों को अपने विचारों को समाज के लिए प्रभावशाली समाधानों में बदलने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम के अंत में एआईयू के संयुक्त निदेशक डॉ. अमरिंदर पाणि ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने इस भव्य और सफल आयोजन के लिए शूलिनी विश्वविद्यालय की भूरि-भूरि प्रशंसा की और इस सम्मेलन को शोधकर्ताओं का महाकुंभ करार दिया। उन्होंने विश्वविद्यालय की सावधानीपूर्वक योजना, शानदार शैक्षणिक माहौल और प्रतिभागी संस्थानों को दी गई बेहतरीन मेहमाननवाज़ी की भी जमकर तारीफ की।