सोलन: विश्व प्रसिद्ध शिक्षण संस्थान द लॉरेंस स्कूल, सनावर ने अपनी गौरवशाली सैन्य परंपराओं को संजोते हुए प्रतिष्ठित कॉफी टेबल बुक The Lawrence School Sanawar: Military Heritage 1847–2025 का भव्य अनावरण किया। नई दिल्ली स्थित मानेकशॉ सेंटर में आयोजित इस गरिमामय समारोह में भारतीय सशस्त्र बलों के शीर्ष नेतृत्व और स्कूल के दिग्गज पूर्व छात्रों ने शिरकत की।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS), जनरल अनिल चौहान ने पुस्तक का विमोचन किया। अपने संबोधन में उन्होंने सनावर की सराहना करते हुए कहा कि वीरता के कार्य कभी संयोग मात्र नहीं होते, बल्कि वे उन मूल्यों और चरित्र का परिणाम होते हैं जो सनावर जैसे संस्थानों में विद्यार्थियों के भीतर विकसित किए जाते हैं। उन्होंने स्कूल की कहानी को भारतीय सेना के इतिहास के साथ अभिन्न बताया।
समारोह में ‘ओल्ड सनावेरियंस’ (Old Sanawarians) की तीन पीढ़ियों के दिग्गज एक ही मंच पर नजर आए। विशिष्ट पैनलिस्ट के रूप में पूर्व नौसेना प्रमुख एडमिरल विष्णु भागवत, पूर्व एयर मार्शल के.सी. ‘नंदा’ करियप्पा और रॉयल नेपाली सेना के पूर्व प्रमुख जनरल गौरव एस.जे.बी. राणा ने भाग लिया। उन्होंने स्कूल द्वारा नेतृत्व निर्माण और सशस्त्र बलों में दिए गए ऐतिहासिक योगदान पर अपने अनुभव साझा किए।
दिल्ली के उपराज्यपाल तरणजीत सिंह संधू ने गेस्ट ऑफ ऑनर के रूप में शिरकत की और स्कूल व उसके पूर्व छात्रों के बीच के अटूट संबंधों को रेखांकित किया।
विद्यालय के हेडमास्टर श्री हिम्मत सिंह ढिल्लों ने 1971 के युद्ध के महानायक और परम वीर चक्र विजेता (मरणोपरांत) सेकंड लेफ्टिनेंट अरुण खेतरपाल के सर्वोच्च बलिदान को याद किया। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक केवल पन्नों का संग्रह नहीं है, बल्कि 1847 से चली आ रही साहस, चरित्र और सेवा की उस विरासत का प्रमाण है जिसे सनावर का हर छात्र हर दिन जीता है।
विशेषज्ञों की टीम ने तैयार किया प्रकाशन
इस ऐतिहासिक दस्तावेज को तैयार करने में एक विशेषज्ञ संपादकीय टीम ने महीनों शोध किया है। इस टीम में मेजर जनरल ए.जे.एस. संधू (सेवानिवृत्त), मेजर जनरल के.वी.एस. लालोटरा (सेवानिवृत्त), मेजर जनरल (डॉ.) कुलप्रीत सिंह (सेवानिवृत्त) प्रसिद्ध सैन्य इतिहासकार श्री सागत शनुइक शामिल रहे।
कार्यक्रम का समापन स्कूल गीत और राष्ट्रगान की गूंज के साथ हुआ। यह प्रकाशन न केवल विद्यालय की 178 वर्षों की यात्रा को दर्शाता है, बल्कि राष्ट्र निर्माण के प्रति सनावर की अटूट प्रतिबद्धता का एक जीवंत दस्तावेज है।