शिमला: हिमाचल प्रदेश राज्य कर्मचारी महासंघ ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा पश्चिम बंगाल सरकार को कर्मचारियों का बकाया महंगाई भत्ता (DA) तुरंत जारी करने के आदेश का जोरदार स्वागत किया है। महासंघ के प्रदेशाध्यक्ष नरेश ठाकुर ने इसे देशभर के सरकारी कर्मचारियों के लिए एक ऐतिहासिक जीत और मील का पत्थर करार दिया है। उन्होंने कहा कि जस्टिस संजय करोल और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की बेंच ने यह स्पष्ट कर दिया है कि महंगाई भत्ता कोई ‘खैरात’ नहीं, बल्कि कर्मचारियों का ‘वैधानिक अधिकार’ है।

शीर्ष अदालत की यह टिप्पणी कि राज्य सरकारें ‘खजाने की तंगी’ का बहाना बनाकर कर्मचारियों के वित्तीय अधिकारों को नहीं रोक सकतीं, हिमाचल के कर्मचारियों के लिए भी एक बड़ी राहत की खबर बनकर आई है।
नरेश ठाकुर ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से सबक लेते हुए हिमाचल सरकार को भी कर्मचारियों और पेंशनरों के लंबित डीए और महंगाई राहत (DR) का भुगतान तुरंत करना चाहिए। उन्होंने अदालत के तर्क का हवाला देते हुए कहा कि डीए वेतन का एक अनिवार्य और गतिशील (Dynamic) हिस्सा है, जिसे नियमों में मनमाना बदलाव कर रोका नहीं जा सकता।
महासंघ ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि बढ़ती महंगाई के बीच कर्मचारियों की ‘वैध अपेक्षा’ (Legitimate Expectation) को तोड़ना असंवैधानिक है। यदि सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के इस स्पष्ट संदेश कि कर्मचारियों के आर्थिक अधिकारों से समझौता नहीं हो सकता की अनदेखी की, तो महासंघ कानूनी और लोकतांत्रिक तरीके से सड़कों पर उतरने और संघर्ष करने के लिए बाध्य होगा।