सोलन वाहन पोर्टल घोटाला: अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश, 6 आरोपी गिरफ्तार

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By Hills Post

सोलन: जिला पुलिस सोलन ने परिवहन विभाग के ऑनलाइन वाहन पोर्टल में सेंध लगाकर सरकारी रिकॉर्ड के साथ छेड़छाड़ करने वाले एक बड़े संगठित साइबर और दस्तावेजी धोखाधड़ी का भंडाफोड़ किया है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए गठित विशेष अन्वेषण दल (SIT) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक सरकारी क्लर्क सहित 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

इस घोटाले का खुलासा तब हुआ जब RLA सोलन की अधिकारी डॉ. पूनम बंसल ने कार्यालयी रिकॉर्ड के सत्यापन के दौरान वाणिज्यिक वाहनों (जैसे HP-14D-4512 आदि) के पंजीकरण और स्वामित्व हस्तांतरण में भारी अनियमितताएं पाई। जांच में सामने आया कि सरकारी लॉगिन क्रेडेंशियल्स का दुरुपयोग कर अधिकृत नेटवर्क के बाहर से पोर्टल में छेड़छाड़ की गई। क्लर्क जितेन्द्र ठाकुर की आईडी के अलावा JITENTHA और अधिकारी के नाम पर DRPOONAM जैसी फर्जी आईडी बनाकर वाहनों की अवैध Verification और Approval की गई। बिना मोटर वाहन निरीक्षक (MVI) की चेकिंग के ही वाहनों का लोडेड वेट (Laden Weight) बढ़ाना, हाइपोथेकेशन हटाना और आरसी (RC) ट्रांसफर जैसे काम धड़ल्ले से किए गए।

तकनीकी साक्ष्यों के विश्लेषण से पता चला कि इस पूरे खेल का मास्टरमाइंड RLA झंडूता में कार्यरत क्लर्क गौरव भारद्वाज है। गौरव ने सोलन कार्यालय के एडमिन क्रेडेंशियल्स अवैध रूप से प्राप्त किए और एजेंटों का एक पूरा नेटवर्क तैयार किया। जांच में आरोपी गौरव भारद्वाज के बैंक खातों में विभिन्न एजेंटों और व्यक्तियों के माध्यम से करोड़ों रुपये का संदिग्ध लेन-देन पाया गया है, जो एक संगठित आर्थिक अपराध की पुष्टि करता है।

गिरफ्तार किए गए 06 आरोपियों में जितेन्द्र ठाकुर (41) क्लर्क, निवासी चण्डी, कसौली (सोलन), अनिल कुमार (42) निवासी झंडूता (बिलासपुर), राज कुमार उर्फ सन्नी (39) निवासी ऊना, जितेन्द्र कुमार (34) निवासी सुंदरनगर (मंडी), नरेश कुमार (43) निवासी बिलासपुर, विकास सिंह उर्फ शालू (27) निवासी नूरपुर (कांगड़ा) शामिल हैं।

पुलिस अधीक्षक सोलन द्वारा DSP अशोक चौहान के नेतृत्व में गठित SIT इस मामले की तह तक जाने के लिए तकनीकी और वित्तीय साक्ष्यों को खंगाल रही है। पुलिस ने नए भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। सभी गिरफ्तार आरोपियों को आज माननीय न्यायालय में पेश किया जा रहा है। पुलिस का मानना है कि रिमांड के दौरान इस गिरोह के अन्य सदस्यों और उन वाहन मालिकों के नाम भी सामने आएंगे जिन्होंने अवैध रूप से अपने वाहनों के दस्तावेज बदलवाए हैं।

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