शिमला: हिमाचल प्रदेश राज्य कर्मचारी महासंघ ने प्रदेश सरकार के एक फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है। महासंघ के प्रदेशाध्यक्ष नरेश ठाकुर ने C&V (शास्त्री और भाषा अध्यापक) श्रेणी के शिक्षकों, ड्राइवरों और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को 20 वर्ष की नियमित सेवा पूरी करने पर मिलने वाली दो विशेष वेतन वृद्धियों (Special Increments) को बंद किए जाने पर कड़ा रोष जताया है। उन्होंने सरकार के इस कदम को हजारों कर्मचारियों के साथ सीधा अन्याय करार देते हुए कहा कि इससे कर्मचारी वर्ग में भारी निराशा और असंतोष व्याप्त है। ठाकुर ने कहा कि वित्त विभाग की 27 सितंबर 2012 की अधिसूचना के तहत यह लाभ कर्मचारियों की लंबी और निष्ठावान सेवा के बदले दिया जा रहा था, जिसे बिना किसी ठोस कारण के छीन लिया गया है।
नरेश ठाकुर ने तकनीकी पहलू पर प्रकाश डालते हुए आरोप लगाया कि हिमाचल प्रदेश सिविल सेवा (संशोधित वेतन) नियम, 2022 के लागू होने के बाद ‘रूल-14’ (Overriding Effect) का हवाला देकर इस महत्वपूर्ण लाभ को समाप्त किया गया है, जबकि नए वेतन नियमों में इस विषय पर कोई स्पष्ट प्रतिबंधात्मक आदेश नहीं है। उन्होंने कहा कि 20 साल की सेवा के बाद मिलने वाला यह प्रोत्साहन कर्मचारियों के मनोबल और कार्यक्षमता को बढ़ाता था। सरकार द्वारा वैकल्पिक व्यवस्था किए बिना इसे बंद करना कर्मचारियों के अधिकारों का हनन है। महासंघ ने मांग की है कि वेतन नियम, 2022 में तत्काल संशोधन या स्पष्टीकरण जारी कर इन श्रेणियों के लिए विशेष वेतन वृद्धि का लाभ तुरंत बहाल किया जाए।
महासंघ ने सरकार को दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि वे कर्मचारियों के हितों से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं करेंगे। नरेश ठाकुर ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार ने शीघ्र इस मुद्दे पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो कर्मचारी महासंघ प्रदेश स्तर पर एक बड़ा आंदोलन छेड़ने के लिए बाध्य होगा। उन्होंने कहा कि इस आंदोलन से उत्पन्न होने वाली किसी भी परिस्थिति की संपूर्ण जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी। महासंघ ने सरकार से आग्रह किया है कि वे इस विसंगति को दूर कर कर्मचारियों को राहत प्रदान करें।