हिमाचल में 3 वर्षों में 1534 लोग लापता, इस जिले में सबसे ज्यादा लोग हुए गायब

शिमला : हिमाचल प्रदेश में गुमशुदगी के मामलों में लगातार हो रही वृद्धि ने प्रशासन और पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विधान सभा में बड़सर के विधायक इन्द्र दत्त लखनपाल द्वारा पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में सरकार ने स्वीकार किया है कि प्रदेश के कई जिलों में गुमशुदगी के मामलों में आंशिक बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है ।

सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में 31 जनवरी 2026 तक प्रदेश भर में गुमशुदगी के कुल 1534 मामले दर्ज किए गए हैं । इनमें से 1267 मामलों में रिपोर्ट दर्ज हुई है, जबकि 107 मामले अभी भी अन्वेषणाधीन (जांच के दायरे में) हैं ।

प्रदेश के मध्यवर्ती और राजधानी क्षेत्र में स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक है। मण्डी जिले में पिछले तीन वर्षों में सर्वाधिक 223 मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें से 23 मामलों में अभी भी जांच जारी है या व्यक्ति का पता नहीं चल पाया है । वहीं, राजधानी शिमला में 186 मामले सामने आए हैं, जिनमें से 10 लोग अब भी लापता हैं । ये आंकड़े बताते हैं कि शहरी और घनी आबादी वाले क्षेत्रों में गुमशुदगी की दर काफी ऊंची है।

सिरमौर की बात करें, तो यहाँ कुल 121 मामले दर्ज किए गए हैं । राहत की बात यह है कि इनमें से अधिकांश (109 मामले) की रिपोर्ट खारिज या सुलझा ली गई है, लेकिन 10 मामले अभी भी न्यायालय में विचाराधीन हैं । कांगड़ा और ऊना जिलों में क्रमशः 136 और 103 मामले दर्ज हुए हैं । सीमावर्ती क्षेत्र होने के कारण यहाँ से लापता होने वाले व्यक्तियों की ट्रैकिंग पुलिस के लिए एक चुनौती बनी हुई है।

सोलन जिले के औद्योगिक हब बद्दी में 124 मामले दर्ज किए गए । यहाँ बाहरी राज्यों से आने वाले कामगारों की भारी संख्या और पंजाब से सीधा संपर्क होने के कारण 14 मामलों में अभी भी जांच (Investigation) चल रही है ।

सदन में यह सवाल भी उठा कि क्या राज्य में रहस्यमय तरीके से गायब हो रहे लोगों के पीछे कोई ‘मानव अंग तस्करी’ करने वाला संगठित गिरोह सक्रिय है । इस पर गृह विभाग (मुख्य मंत्री) ने स्पष्ट रूप से इनकार किया है । सरकार के अनुसार, प्रदेश में ऐसा कोई भी मामला या गिरोह पुलिस के संज्ञान में नहीं आया है । इसी कारण किसी भी मामले को सी०बी०आई० को सौंपने की आवश्यकता नहीं पड़ी है ।

रिपोर्ट के मुताबिक, गुमशुदगी के इन मामलों में से 143 मामले न्यायालय में प्रेषित किए गए हैं । हालांकि, सजा मिलने की दर अभी भी बहुत कम है; कुल मामलों में से अब तक केवल 4 मामलों में सजा हुई है, जबकि 135 मामले अभी भी विचाराधीन हैं ।

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पंकज जयसवाल

पंकज जयसवाल, हिल्स पोस्ट मीडिया में न्यूज़ रिपोर्टर के तौर पर खबरों को कवर करते हैं। उन्हें पत्रकारिता में करीब 2 वर्षों का अनुभव है। इससे पहले वह समाज सेवी संगठनों से जुड़े रहे हैं और हजारों युवाओं को कंप्यूटर की शिक्षा देने के साथ साथ रोजगार दिलवाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है।