शिमला: हिमाचल प्रदेश सरकार के उद्योग विभाग ने राज्य की समृद्ध हथकरघा परंपरा को वैश्विक पटल पर ले जाते हुए एक नया इतिहास रच दिया है। विभाग ने एक ही स्थान पर सर्वाधिक हस्तनिर्मित शॉलों का प्रदर्शन कर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि के तहत कुल 4,023 हस्तनिर्मित शॉलों को एक साथ प्रदर्शित किया गया, जो अपने आप में एक विश्व कीर्तिमान है। यह उपलब्धि न केवल हिमाचल प्रदेश के लिए गर्व का विषय है, बल्कि यह देशभर के हस्तशिल्प और हथकरघा क्षेत्र के लिए भी एक प्रेरणास्रोत बन गई है। इस रिकॉर्ड की आधिकारिक पुष्टि गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स संस्था द्वारा की गई है।

इस भव्य आयोजन में हिमाचल प्रदेश के सभी 12 जिलों से आए कारीगरों और महिला स्वयं सहायता समूहों (SHGs) द्वारा तैयार की गई शॉलों को प्रदर्शित किया गया। यह दृश्य हिमाचल की रंग-बिरंगी बुनाई कला, सांस्कृतिक विरासत और कारीगरों के अद्वितीय कौशल का एक सुंदर प्रतीक बनकर उभरा।
उद्योग विभाग और हिमाचल प्रदेश हैंडीक्राफ्ट्स एंड हैंडलूम कॉरपोरेशन लिमिटेड के संयुक्त प्रयासों से आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य स्थानीय बुनकरों की कला का सम्मान करना, राज्य की लुप्त होती हैंडलूम धरोहर को जीवित रखना और हिमाचली शॉलों को भारत की पारंपरिक व टिकाऊ शिल्पकला के प्रतीक के रूप में विश्वभर में पहचान दिलाना था।
इस गौरवशाली क्षण के साक्षी बनते हुए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने राज्य सरकार और प्रदेश के हजारों कारीगरों की ओर से गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड का प्रमाण पत्र प्राप्त किया। मुख्यमंत्री ने इस उपलब्धि को प्रदेश के उन हजारों बुनकरों की मेहनत और लगन को समर्पित किया, जिन्होंने अपनी कला से राज्य का नाम ऊंचा किया है।
इस अवसर पर उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे। सरकार का मानना है कि यह अंतरराष्ट्रीय सम्मान कारीगरों को सशक्त बनाने, युवाओं को पारंपरिक बुनाई से जोड़ने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।