शिमला: भाजपा के राज्यसभा सांसद हर्ष महाजन ने प्रदेश की वर्तमान कांग्रेस सरकार पर कड़ा प्रहार करते हुए हिमाचल प्रदेश की आर्थिक स्थिति को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि प्रदेश आज इतिहास के सबसे कठिन दौर से गुजर रहा है, जहाँ भ्रष्टाचार, प्रशासनिक विफलता और कर्ज का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। उन्होंने आगामी नगर निगम और पंचायत चुनावों को हिमाचल को बचाने का एक निर्णायक अवसर करार दिया।

सांसद हर्ष महाजन ने आंकड़ों के साथ सरकार की आर्थिक कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की ताजा रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि प्रदेश के 12 निगम और बोर्ड वर्तमान में ₹6454 करोड़ से अधिक के घाटे में हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि एफआरबीएम (FRBM) एक्ट के तहत राजकोषीय घाटे की सीमा 3.5 प्रतिशत होनी चाहिए, लेकिन हिमाचल में यह खतरनाक स्तर पर पहुँचकर 5.43 प्रतिशत हो गई है।
हर्ष महाजन ने प्रदेश की वित्तीय सेहत पर प्रहार करते हुए कहा कि सरकार की कुल आय का 72 प्रतिशत हिस्सा केवल कर्मचारियों के वेतन, पेंशन और पुराने कर्जों का ब्याज चुकाने में खर्च हो रहा है। उन्होंने कहा कि स्थिति इतनी विकट है कि पुराने कर्ज की किश्तें भरने के लिए सरकार को नया कर्ज उठाना पड़ रहा है। उन्होंने सवाल किया कि यदि सारा पैसा इसी में चला जाएगा, तो सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और युवाओं के रोजगार के लिए बजट कहाँ से आएगा?
पुरानी पेंशन योजना पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने ओपीएस बहाल तो कर दी, लेकिन इसके लिए कोई अलग से पेंशन फंड नहीं बनाया गया है। उन्होंने आशंका जताई कि बिना किसी ठोस वित्तीय योजना के आने वाले समय में पेंशन का पूरा बोझ सरकारी खजाने पर पड़ेगा, जिससे प्रदेश की आर्थिक स्थिति और अधिक भयावह हो जाएगी।
सांसद ने प्रदेश की जनता से अपील करते हुए कहा कि नगर निगम, जिला परिषद और पंचायतों के चुनाव केवल स्थानीय जनप्रतिनिधि चुनने के लिए नहीं हैं, बल्कि यह कांग्रेस सरकार की “झूठी गारंटियों” और “धोखे की राजनीति” को जवाब देने का समय है। उन्होंने कहा कि सात बड़े सरकारी उपक्रमों की नेटवर्थ अब नकारात्मक हो चुकी है, जिसका सीधा असर आने वाले समय में प्रदेश के विकास और युवाओं के भविष्य पर पड़ेगा।
हर्ष महाजन ने विश्वास जताया कि जनता इस बार भाजपा समर्थित प्रत्याशियों को जिताकर सरकार को एक कड़ा राजनीतिक संदेश देगी कि प्रदेश अब कुशासन और आर्थिक अव्यवस्था को और अधिक बर्दाश्त नहीं करेगा।