हिमाचल: सेब को अल्टरनेरिया रोग से बचाने के लिए 5 जिलों में शुरू हुआ महाअभियान

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By Hills Post

सोलन: हिमाचल प्रदेश में सेब के बागीचों को अल्टरनेरिया और मार्सोनिना लीफ ब्लॉच जैसी बीमारियों से बचाने के लिए नौणी यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने कमर कस ली है। आज मंगलवार को वैज्ञानिकों की आठ टीमें सीधे बागवानों के बीच पहुंचीं। यह व्यापक जागरूकता अभियान शिमला, कुल्लू, किन्नौर, चंबा और मंडी जिलों के उन इलाकों में शुरू किया गया है, जहां इन बीमारियों का खतरा सबसे ज्यादा है।

डॉ. वाईएस परमार यूनिवर्सिटी (नौणी) के साथ-साथ मशोबरा, बजौरा और किन्नौर के रिसर्च सेंटर्स और कृषि विज्ञान केंद्रों के वैज्ञानिक इस मुहिम का हिस्सा हैं। इनका मुख्य मकसद बागवानों को यह समझाना है कि बिना सोचे-समझे रसायनों का छिड़काव करने से नुकसान हो रहा है। 10 से 19 फरवरी तक चलने वाले इस अभियान में वैज्ञानिक बागवानों को मौके पर ही बता रहे हैं कि बीमारी के शुरुआती लक्षणों को कैसे पहचानें और सही समय पर कौन सा उपाय करें।

अभियान के पहले दिन मंगलवार को वैज्ञानिकों ने प्रदेश के कई प्रमुख सेब उत्पादक क्षेत्रों का दौरा किया। शिमला जिले में चार टीमें सक्रिय रहीं, जिन्होंने आज बागी, रत्नारी, कलबोग, शीलघाट, नकरारी, चियोग, तियाली, कांद्रू और भराणा क्षेत्रों में जाकर बागवानों को जागरूक किया। अब ये टीमें बुधवार यानी 11 फरवरी को चैथला, धारोंक, टिक्कर, करचारी, संधू, शिलारू, थानेधार और खनेटी इलाकों में जाकर बागवानों को जानकारी देंगी। इसी तरह, किन्नौर जिले में आज निचार और सुंगरा के बागीचों का जायजा लिया गया, जबकि कल टीम बारी और पोंडा क्षेत्रों में जाएगी।

अन्य जिलों में भी वैज्ञानिकों की सक्रियता देखने को मिली। चंबा जिले के भरमौर क्षेत्र में आज अभियान चलाया गया और बुधवार को टीम होली क्षेत्र में बागवानों से मिलेगी। कुल्लू जिले में आज गड़सा घाटी के बागवानों को जानकारी दी गई, वहीं 11 और 12 फरवरी को मणिकर्ण घाटी में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

मंडी जिले में भी वैज्ञानिकों ने आज संगलवाड़ा और धीम कटारू में कैंप लगाए, जबकि कल जंजैहली और तुंगधार क्षेत्रों का दौरा किया जाएगा। इस पूरे अभियान का सीधा फायदा यह होगा कि बागवान सही और कम खर्च में अपनी फसल बचा सकेंगे, जिससे उनकी कमाई में बढ़ोतरी होगी और प्रदेश में सेब का उत्पादन टिकाऊ बना रहेगा।

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