एल.आर. इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन में आयोजित हुई कार्यशाला

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By Hills Post

सोलन: एल.आर. इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन, सोलन में विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास, आत्म-जागरूकता और भविष्य के कौशलों को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से व्यक्तिगत रूपांतरण, मानवीय क्षमता एवं जन्मजात प्रतिभाओं की पहचान विषय पर एक भव्य व्याख्यान-सह-कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में संस्थान की प्राचार्य डॉ. निशा शर्मा की गरिमामयी उपस्थिति रही।

कार्यक्रम में आईजीएमसी, शिमला के प्रो. (डॉ.) बी.एस. चौहान और दुबई की Certifai Technologies FZCO से आर.डी. औलख ने विशेषज्ञ वक्ताओं के रूप में विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया। उन्होंने आत्म-जागरूकता, मानवीय क्षमताओं की पहचान, रचनात्मक सोच, समस्या-समाधान, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल तकनीक और भविष्य की माँग के अनुसार आवश्यक कौशलों पर विस्तार से चर्चा की। इसके साथ ही, राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 (NEP) और अनुभवात्मक शिक्षा के महत्व पर भी विशेष प्रकाश डाला गया।

प्राचार्य डॉ. निशा शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि आधुनिक शिक्षा केवल अंकों और पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि यह विद्यार्थियों में सोचने, सृजन करने, समस्या-समाधान तथा बदलती परिस्थितियों के अनुरूप स्वयं को ढालने की क्षमता विकसित करने वाली होनी चाहिए। इस कार्यशाला के दौरान विद्यार्थियों के लिए साइकोमेट्रिक टेस्ट, कराडा स्कैन, ब्रेन बैलेंसिंग और ब्रेन जिम जैसी अनेक रोचक एवं उपयोगी गतिविधियां आयोजित की गई, जिनमें विद्यार्थियों ने पूरे उत्साह के साथ भाग लिया।

संस्थान की प्रबंध निदेशक डॉ. शची सिंह ने इस प्रकार के आयोजनों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे व्याख्यान और कार्यशालाएं विद्यार्थियों के व्यावहारिक ज्ञान और आत्मविश्वास में उल्लेखनीय वृद्धि करती हैं।

कार्यक्रम की समन्वयक प्रोफेसर मेघा ठाकुर रहीं, जबकि संकाय सदस्यों प्रोफेसर सुचिता ठाकुर, सुश्री भावना, प्रोफेसर प्रियंका शर्मा, प्रोफेसर अमृता तथा गैर-शिक्षण स्टाफ से राविका ने कार्यक्रम को सफल बनाने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। कार्यक्रम के अंत में वक्ताओं का आभार व्यक्त किया गया, और विद्यार्थियों ने इसे अत्यंत ज्ञानवर्धक व अनुभवात्मक बताते हुए भविष्य में भी ऐसे सत्र आयोजित करने की इच्छा जताई।

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