सोलन: भारतीय सेना की सेंट्रल कमांड के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता ने आज छावनी शहर कसौली से एक ऐतिहासिक और पर्यावरण-अनुकूल ‘सूर्य ग्रीन – हिमालयन ओडिसी’ इलेक्ट्रिक वाहन (EV) अभियान को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। टाटा ईवी (Tata EV) के सहयोग से आयोजित यह अनूठा काफिला 11 दिनों के भीतर हिमाचल प्रदेश और लद्दाख के बेहद दुर्गम, बर्फीले और सीमावर्ती क्षेत्रों से गुजरते हुए अपनी चुनौती को पूरा करेगा।

सूर्य कमांड के मार्गदर्शन में गोल्डन की डिवीजन द्वारा आयोजित यह साहसिक अभियान पूरी तरह से स्वदेशी इलेक्ट्रिक वाहनों पर आधारित है। इस अभियान में टाटा मोटर्स के कुल 10 आधुनिक इलेक्ट्रिक वाहन शामिल हैं, जिनमें छह (06) टाटा हैरियर ईवी, तीन (03) टाटा कर्व ईवी और एक (01) टाटा पंच ईवी शामिल हैं। यह काफिला 11 दिनों में कुल 1,663 किलोमीटर की कठिन दूरी तय करेगा। इस दौरान यह दल स्पीति, लाहौल, हान्ले, चुशुल और तांग्त्से जैसे लद्दाख के सुदूर और शून्य से नीचे तापमान वाले भू-भागों को पार करेगा।
इस ओडिसी का समापन आगामी 22 जून 2026 को लेह (लद्दाख) स्थित ऐतिहासिक ‘हॉल ऑफ फेम’ (Hall of Fame) में किया जाएगा। इस ऐतिहासिक अभियान का नेतृत्व गोल्डन की डिवीजन के मेजर अमन सिंह यादव कर रहे हैं। इस साहसिक दल में भारतीय सेना के 10 जांबाज जवान, टाटा ईवी के 5 तकनीकी प्रतिनिधि और 2 प्रमुख डिजिटल कंटेंट क्रिएटर शामिल हैं। यह टीम सैन्य परिचालन विशेषज्ञता और आधुनिक ऑटोमोबाइल वाहन प्रौद्योगिकी के बेहतरीन समन्वय का प्रतीक है।

यह यात्रा मार्ग दुनिया के कुछ सबसे ऊंचे और खतरनाक मोटरयोग्य दर्रों (Mountain Passes) से होकर गुजरता है। जिसमें उमलिंग ला (Umling La) 19,024 फीट की ऊंचाई पर स्थित विश्व का सबसे ऊंचा मोटरयोग्य दर्रा है, जहां यह काफिला शून्य ऑक्सीजन और कठिन चढ़ाई के बीच इलेक्ट्रिक वाहनों की सहनशक्ति का परीक्षण करेगा। चांग ला (Chang La) 17,590 फीट की ऊंचाई पर स्थित यह दर्रा भी मनुष्य और मशीन दोनों की असाधारण क्षमता की कड़ी परीक्षा लेगा।
अपनी यात्रा के दौरान यह सैन्य दल ऐतिहासिक रेजांग ला युद्ध स्मारक (Rezang La War Memorial) पर विशेष रूप से रुकेगा। यहां वर्ष 1962 के भारत-चीन युद्ध में अदम्य साहस का परिचय देने वाले ’13 कुमाऊँ रेजीमेंट’ के वीर जवानों के सर्वोच्च बलिदान और शौर्य को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी।
इसके अतिरिक्त, यह अभियान दल रास्ते में आने वाले पर्वतीय क्षेत्रों के स्थानीय जनजातीय समुदायों, सीमावर्ती युवाओं और शैक्षणिक संस्थानों के छात्र-छात्राओं से सीधा संवाद स्थापित करेगा। टीम का मुख्य उद्देश्य नाजुक हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण, जिम्मेदार गतिशीलता और पर्यावरण सुरक्षा के प्रति जन-जागरूकता फैलाना है।
यह अभियान स्वच्छ गतिशीलता (Clean Mobility) और स्वदेशी हरित प्रौद्योगिकी (Green Technology) को बढ़ावा देने के भारत सरकार के दृष्टिकोण के बिल्कुल अनुकूल है। नाजुक और पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील हिमालयन इकोसिस्टम को कार्बन उत्सर्जन से बचाने और सैन्य-नागरिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में भारतीय सेना के इस अभिनव प्रयास की हर तरफ सराहना हो रही है। यह अभियान देश के युवाओं को साहस, जीवटता और राष्ट्रसेवा की भावना से ओतप्रोत होने के लिए भी प्रेरित करेगा।