सोलन: गुरुकुल इंटरनेशनल सीनियर सेकेंडरी स्कूल, सोलन ने अपना 20वाँ वार्षिक समारोह अत्यंत भव्यता, उत्साह और सांस्कृतिक गरिमा के साथ मनाया। इस वर्ष समारोह की केंद्रीय थीम ‘चरैवेति चरैवेति – यात्रा निरंतर जारी है’ रखी गई, जिसने उपस्थित अतिथियों, अभिभावकों और दर्शकों को निरंतर आगे बढ़ने, परिश्रम करने तथा अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहने का एक गहरा संदेश दिया।
गरिमामयी उपस्थिति
समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में 1 एच.पी. एन.सी.सी. बटालियन, सोलन के कमांडिंग ऑफिसर कर्नल राजीव थॉमस ने शिरकत की। इसके अलावा, डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी सोल) की अनुसंधान निदेशक डॉ. देविना वैद्य और सोलन नगर निगम की महापौर श्रीमती सुषमा शर्मा विशिष्ट अतिथियों के रूप में उपस्थित रहीं। नगर निगम सोलन के उपमहापौर गौरव राजपूत ने विशेष आमंत्रित अतिथि के रूप में समारोह की शोभा बढ़ाई। विद्यालय प्रबंधन समिति के सदस्यों, अभिभावकों और गणमान्य नागरिकों की मौजूदगी ने इस आयोजन को और भी खास बना दिया।

मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ और जीवन मूल्य
समारोह का सबसे आकर्षक पहलू विद्यार्थियों की रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ रहीं, जिन्होंने भारतीय सभ्यता, संस्कृति और जीवन दर्शन को मंच पर जीवंत कर दिया:
रामायण और महाभारत: प्रेरणादायक प्रसंगों के माध्यम से मर्यादा, धर्म, कर्तव्य, सत्य, साहस और कर्मयोग जैसे शाश्वत मूल्यों को प्रस्तुत किया गया।
पंचतत्त्व: पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश के जरिए प्रकृति और मानव जीवन के गहरे रिश्ते को कलात्मक तरीके से दर्शाया गया।
परंपरा और आधुनिकता का संगम: विद्यार्थियों ने अपनी प्रस्तुति से यह संदेश दिया कि आधुनिक शिक्षा और तकनीक के साथ चलना जितना जरूरी है, अपनी संस्कृति और संस्कारों को सहेजना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
अतिथियों ने की सराहना
मुख्य अतिथि कर्नल राजीव थॉमस ने विद्यार्थियों की शानदार प्रस्तुतियों और विद्यालय के अनुशासित माहौल की मुक्तकंठ से सराहना की। उन्होंने बच्चों के आत्मविश्वास और प्रतिभा की प्रशंसा करते हुए उन्हें जीवन में निरंतर आगे बढ़ते रहने के लिए प्रेरित किया। अन्य अतिथियों ने भी इस बात पर जोर दिया कि आधुनिकता के दौर में बच्चों को संस्कृति से जोड़े रखना विद्यालय का एक सराहनीय कदम है।
दो दशकों की शैक्षणिक उत्कृष्टता, संस्कारों और उपलब्धियों का यह 20वाँ वार्षिक समारोह इस संकल्प के साथ संपन्न हुआ कि परंपराओं की मजबूत नींव पर आधुनिकता की नई ऊँचाइयों को छूते हुए प्रगति का यह सफर यूं ही निरंतर जारी रहेगा।