शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज शिमला में स्वास्थ्य विभाग की एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए घोषणा की कि राज्य सरकार चिकित्सा अधिकारियों (विशेषज्ञ) को नॉन-प्रैक्टिसिंग अलाउंस (NPA) प्रदान करने पर गंभीरता से विचार कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार राज्य के नागरिकों को विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और इस दिशा में लगातार कई प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं, जिनके सकारात्मक परिणाम भी सामने आ रहे हैं। सरकार द्वारा प्रदेश के सभी सरकारी चिकित्सा महाविद्यालयों के सुदृढ़ीकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है तथा स्वास्थ्य संस्थानों में रिक्त पड़े सभी पदों को चरणबद्ध तरीके से भरा जा रहा है।

कैंसर देखभाल संस्थानों के लिए 800 करोड़ रुपये का प्रावधान
प्रदेश में कैंसर के मामलों में हो रही वृद्धि पर चिंता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार पूरे प्रदेश में कैंसर देखभाल संस्थानों को और अधिक मजबूत व आधुनिक बनाने जा रही है, जिस पर 800 करोड़ रुपये व्यय किए जाएंगे। उन्होंने इन संस्थानों के सुदृढ़ीकरण के वास्ते भविष्य की ठोस कार्ययोजना तैयार करने के लिए एक विशेषज्ञ समिति गठित करने के कड़े निर्देश भी दिए। एम्स (AIIMS) दिल्ली की तर्ज पर अत्याधुनिक मशीनों और उपकरणों की खरीद की प्रक्रिया वर्तमान में जारी है, जिससे प्रदेश के अस्पतालों में मरीजों की गंभीर बीमारियों की जांच और उनके उपचार की सुविधाओं में अभूतपूर्व सुधार होगा।
चिकित्सा क्षेत्र के लिए विदेशी एक्सपोजर विजिट की योजना
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र के विद्यार्थियों और फैकल्टी को विश्वस्तरीय उपचार पद्धतियों तथा आधुनिक कार्यप्रणालियों से रूबरू करवाने के लिए विदेशों के प्रतिष्ठित स्वास्थ्य संस्थानों में एक्सपोजर विजिट करवाने की योजना बनाई जा रही है। उल्लेखनीय है कि सरकार पहले ही स्कूलों और तकनीकी संस्थानों के मेधावी विद्यार्थियों को विदेशी दौरों पर भेज रही है, जिससे उनके कौशल का संवर्द्धन हो रहा है। इसके साथ ही, सरकार चिकित्सा क्षेत्र में जीन और मॉलिक्यूलर थेरेपी जैसी आधुनिक स्वास्थ्य उपचार तकनीकों को अपनाने की दिशा में भी तेजी से आगे बढ़ रही है।
बैठक में ये रहे उपस्थित
इस अवसर पर उप-मुख्य सचेतक केवल सिंह पठानिया, विधायक संजय अवस्थी, हिमाचल प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कामगार कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष नरदेव कंवर, स्वास्थ्य सचिव आशीष सिंहमार सहित कई अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। इसके अलावा, प्रदेश के विभिन्न सरकारी चिकित्सा महाविद्यालयों के प्रधानाचार्य इस बैठक में वर्चुअल माध्यम से जुड़े।