सोलन: डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय में वानिकी वैज्ञानिक डॉ. जयपाल शर्मा ने विश्वविद्यालय के वृक्ष सुधार एवं आनुवंशिक संसाधन विभाग के विभागाध्यक्ष के रूप में कार्यभार संभाल लिया है। डॉ. जयपाल शर्मा पिछले 17 वर्षों से वानिकी एवं कृषि वानिकी के क्षेत्र में शिक्षण, अनुसंधान और विस्तार गतिविधियों में सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं।

उन्हें अल्पावधि वृक्ष प्रजातियों, विशेषकर विलो हाइब्रिड के सुधार, मूल्यांकन और विकास में विशेषज्ञता हासिल है। उनके द्वारा विकसित किए गए उन्नत विलो हाइब्रिड आज हिमालयी क्षेत्रों के किसानों और अन्य हितधारकों के बीच काफी लोकप्रिय हैं और बड़े पैमाने पर लगाए जा रहे हैं।
वर्तमान में डॉ. शर्मा प्रोटेक्शन ऑफ प्लांट वैरायटीज़ एंड फार्मर्स राइट्स अथॉरिटी के तहत विलो किस्मों के पंजीकरण के लिए गठित टास्क फोर्स के सदस्य के रूप में भी अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इसके अलावा, वे दो बड़ी बाह्य वित्तपोषित परियोजनाओं डीयूएस सेंटर फॉर विलो और सी-बकथॉर्न से भी महत्वपूर्ण रूप से जुड़े रहे हैं। वानिकी अनुसंधान के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए वर्ष 2012 में उन्हें प्रतिष्ठित इंडियन फॉरेस्टर द्वारा ब्रांडिस पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. हरमिंदर सिंह बवेजा ने डॉ. जयपाल शर्मा को उनकी इस नई और महत्वपूर्ण जिम्मेदारी के लिए बधाई दी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि डॉ. शर्मा के लंबे अनुभव और कुशल नेतृत्व में यह विभाग अनुसंधान, शिक्षा और किसानों के कल्याण की दिशा में नए आयाम स्थापित करेगा। उनकी इस नियुक्ति पर विश्वविद्यालय के अन्य वरिष्ठ वैज्ञानिकों, प्राध्यापकों और स्टाफ सदस्यों ने भी खुशी जाहिर की है और उन्हें शुभकामनाएं प्रेषित की हैं।