तिब्बत की आजादी और चीनी नीति के विरोध में पांवटा साहिब से धर्मशाला तक साइकिल रैली

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By Hills Post

पांवटा साहिब: क्षेत्रीय तिब्बती युवा कांग्रेस (RTYC) पांवटा साहिब द्वारा 13 से 20 अगस्त 2026 तक एक शांतिपूर्ण साइकिल रैली का आयोजन किया जा रहा है। यह साइकिल रैली पांवटा साहिब से शुरू होकर विभिन्न शहरों से गुजरते हुए धर्मशाला में संपन्न होगी। रैली का मुख्य उद्देश्य न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के समक्ष आत्मदाह करने वाले शहीद लोबगा रंगज़ेन के बलिदान को सम्मान देना तथा चीन सरकार द्वारा लागू किए जा रहे तथाकथित जातीय एकता कानून का कड़ा विरोध करना है।

उल्लेखनीय है कि शहीद लोबगा रंगज़ेन ने 2 जुलाई 2026 को न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के सामने आत्मदाह किया था, ताकि तिब्बती समुदाय पर हो रहे अत्याचारों की ओर अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान आकर्षित किया जा सके। तिब्बती संगठन का मानना है कि चीन का जातीय एकता कानून तिब्बती पहचान, भाषा, संस्कृति और धार्मिक स्वतंत्रता के अस्तित्व के लिए एक गंभीर खतरा है।

रैली का मार्ग और यात्रा कार्यक्रम
यह शांतिपूर्ण साइकिल रैली आज सुबह 7:00 बजे पांवटा चोलसुम तिब्बती बस्ती से रवाना हुई । आठ दिनों की इस यात्रा के दौरान प्रतिभागी काला अंब, चंडीगढ़, कीरतपुर साहिब, ऊना, अंब, बरवाड़ा और कांगड़ा होते हुए धर्मशाला पहुँचेंगे।

तिब्बती युवा कांग्रेस ने चीन सरकार, संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के समक्ष कई प्रमुख मांगें रखी हैं। संगठन ने तिब्बत में दमनकारी परिस्थितियों और आत्मदाह की घटनाओं पर संयुक्त राष्ट्र तथा अंतरराष्ट्रीय समुदाय से औपचारिक और सार्थक प्रतिक्रिया की मांग की है। साथ ही, चीन को उन नीतियों के लिए जवाबदेह ठहराने का आग्रह किया है जिनके कारण लोबगा रंगज़ेन और कई अन्य तिब्बतियों को आत्मदाह जैसे कठोर कदम उठाने पड़े। इसके अतिरिक्त, तिब्बती संस्कृति को जबरन समाप्त करने वाले जातीय एकता कानून को तुरंत रद्द करने और पूरे तिब्बत में इसके क्रियान्वयन पर रोक लगाने की मांग भी की गई है।

भारत सरकार का जताया आभार

क्षेत्रीय तिब्बती युवा कांग्रेस के अध्यक्ष नवांग पेलजोर ने भारत सरकार और भारत की जनता का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि लंबे समय से निर्वासन में रह रहे तिब्बतियों को भारत का निरंतर और अटूट समर्थन मिलता रहा है, जिसके लिए वे सदैव ऋणी रहेंगे।

इस साइकिल रैली में नवांग पेलजोर, नामग्याल, जाम्पा येशी, वांग्याल, कर्मा टाशी, यारफेल, नामग्याल टाशी, छेरिंग तेनज़िन, तेनज़िन छेरिंग और नवांग तेनपा सहित तिब्बती समुदाय के युवा मुख्य रूप से भाग ले रहे हैं।

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