नाहन : विकास और पर्यावरण संरक्षण के बड़े-बड़े दावे करने वाले नेताओं का चुनावी रंग अब पर्यावरण पर भारी पड़ने लगा है। ताजा मामला नाहन के दो सड़का मार्ग से सामने आया है, जहाँ जांगीरुग के रेन शेल्टर के साथ ही जिला परिषद वार्ड के एक प्रत्याशी द्वारा चुनावी प्रचार के लिए मर्यादा और नियमों की सारी सीमाएं लांघ दी गईं। प्रत्याशी ने अपने प्रचार बैनर को टांगने के लिए एक हरे-भरे पीपल के पेड़ पर बेरहमी से कई बड़ी कीलें ठोंक दीं।
सड़क से गुजरने वाले स्थानीय लोगों और पर्यावरण प्रेमियों ने जब इस नजारे को देखा, तो उनमें भारी रोष पनप गया। लोगों का कहना है कि जो प्रत्याशी चुनाव जीतने से पहले ही सार्वजनिक संपत्ति और मूक पेड़ों पर इस कदर अत्याचार कर रहे हैं, वे चुनकर आने के बाद क्षेत्र का क्या विकास करेंगे?

वैसे भी सनातन परंपरा में पीपल के पेड़ को पूजनीय माना जाता है, वहीं पर्यावरण की दृष्टि से भी इसे सबसे ज्यादा ऑक्सीजन देने वाला पेड़ कहा जाता है। ऐसे में एक सम्मानित जिला परिषद वार्ड के प्रत्याशी द्वारा अपने फायदे के लिए पेड़ को इस तरह नुकसान पहुँचाना न केवल पर्यावरण नियमों का उल्लंघन है, बल्कि लोगों की धार्मिक आस्था को भी ठेस पहुँचाने जैसा है।
सार्वजनिक स्थानों, सड़कों के किनारे लगे पेड़ों पर किसी भी प्रकार के विज्ञापन, बैनर या होर्डिंग लगाने के लिए कीलें ठोंकना कानूनन अपराध की श्रेणी में आता है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के सख्त निर्देश हैं कि पेड़ों को विज्ञापनों से मुक्त रखा जाए क्योंकि कीलें ठोंकने से पेड़ अंदर से खोखले हो जाते हैं और धीरे-धीरे सूख जाते हैं। इसके बावजूद, इस प्रत्याशी ने सरेआम नियमों की धज्जियां उड़ाईं।
स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों ने प्रशासन और वन विभाग से मांग की है कि इस मामले का तुरंत संज्ञान लिया जाए, पेड़ से बैनर हटवाए जाएं और नियमों का उल्लंघन करने वाले प्रत्याशी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाए ताकि भविष्य में कोई अन्य नेता ऐसी हरकत न कर सके।