नाहन: मियां मंदिर की जर्जर दीवार के नीचे खौफ में जी रहे परिवारों ने विधायक से की भावुक अपील

नाहन : हिमाचल प्रदेश में मानसून की पहली बारिश ने जिला मुख्यालय नाहन में कई जगह संकट खड़ा कर दिया है। लेकिन नाहन के मियां मंदिर के पास रहने वाले स्थानीय परिवार पिछले 11 सालों से एक प्रशासनिक अनदेखी के कारण बड़े हादसे के खौफ में जीने को मजबूर हैं। मियां मंदिर की जर्जर हो चुकी दीवार और ढांचा साथ लगते मकानों के साथ बिल्कुल सटा हुआ है, जो कभी भी धराशायी हो सकता है। हैरान करने वाली बात यह है कि पीड़ित परिवार साल 2015 से लगातार प्रशासन, विधायकों और मुख्यमंत्रियों तक गुहार लगा चुके हैं, लेकिन आज तक इस समस्या का कोई स्थाई समाधान नहीं निकला।

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा और चौंकाने वाला तथ्य यह है कि यह मंदिर जगन्नाथ मंदिर प्रबंधन के अधीन आता है, जिसके अध्यक्ष खुद जिला उपायुक्त (DC Sirmaur) हैं। ऐसे में जब पीड़ित परिवार शिकायत लेकर जाते हैं और अधिकारी “बजट नहीं है” या “आय नहीं है” का रोना रोते हैं, तो सीधे तौर पर प्रशासनिक इच्छाशक्ति पर सवाल खड़े होते हैं। जब जिले के सबसे बड़े अधिकारी ही मंदिर प्रबंधन के मुखिया हैं, तो एक जर्जर दीवार को ठीक करवाने के लिए 11 साल का समय क्यों लग रहा है? क्या प्रशासन किसी बड़ी अनहोनी या जान-माल के नुकसान का इंतजार कर रहा है?

स्थानीय निवासी सत्यदेव सिंघानिया ने बताया कि वह पिछले कई वर्षों से लगातार शिकायतें कर रहे हैं। मंदिर प्रबंधन हर बार इसे अस्थाई रूप से ठीक (Temporary इलाज) करके छोड़ देता है। पिछले साल 2025 में भी यहाँ मलबा गिरा था, जिसे थोड़ा-बहुत हटाया गया था। लेकिन इस मानसून में स्थिति और अधिक खौफनाक हो चुकी है। मंदिर की दीवार अब पूरी तरह से तिरछी (झुक) हो चुकी है ।

इसी मंदिर से बिल्कुल सटकर एक और घर है, जहाँ पूर्णिमा और उनकी माता रहती हैं। इस घर पर भी हादसे का उससे भी बड़ा खतरा मंडरा रहा है। पूर्णिमा ने बताया कि इस समस्या को सुलझाने के लिए उनके पिता ने जीते-जी सरकारी दफ्तरों के बेहद चक्कर काटे, लेकिन प्रशासन की कान पर जूं तक नहीं रेंगी। अब उनके पिता के बाद पूर्णिमा खुद अपनी माता की सुरक्षा और इस जर्जर दीवार को ठीक करवाने की जंग लड़ रही हैं।

पूर्णिमा ने बताया कि वह खुद साल 2024 में तत्कालीन डीसी सुमित खिमटा से भी मिली थीं। इसके अलावा उन्होंने पूर्व में तहसीलदार साहब और जेई से भी बात की थी। जिला उपायुक्त (DC Sirmaur) को मौके की तस्वीरें दिखाकर खतरे से अवगत कराया गया था, लेकिन धरातल पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।

खतरे की जद में आए स्थानीय निवासियों का दर्द छलक उठा है। उनका कहना है, “हम हर बार वोट देते हैं, कभी मिस नहीं करते। लेकिन आज जब हम मुसीबत में हैं, तो हमारी कोई सुनने वाला नहीं है। क्या हम इंसान नहीं हैं?”

प्रभावित परिवारों ने स्थानीय विधायक अजय सोलंकी और वर्तमान जिला प्रशासन से हाथ जोड़कर भावुक अपील की है कि वे तुरंत मौके का मुआयना करें। मानसून की इस भारी बारिश में पानी के रिसाव के कारण यह जर्जर ढांचा कभी भी इन घरों पर गिर सकता है। दोनों परिवारों ने मांग की है कि राजनीति और बहानों से ऊपर उठकर इस जर्जर दीवार को तुरंत पक्का करवाया जाए ताकि वे चैन की सांस ले सकें।

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पंकज जयसवाल

पंकज जयसवाल, हिल्स पोस्ट मीडिया में न्यूज़ रिपोर्टर के तौर पर खबरों को कवर करते हैं। उन्हें पत्रकारिता में करीब 2 वर्षों का अनुभव है। इससे पहले वह समाज सेवी संगठनों से जुड़े रहे हैं और हजारों युवाओं को कंप्यूटर की शिक्षा देने के साथ साथ रोजगार दिलवाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है।