नौणी यूनिवर्सिटी और बायर क्रॉप साइंस में MOU, परिसर में खुलेगा लर्निंग सेंटर

सोलन: डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी और विश्व की अग्रणी फसल विज्ञान कंपनियों में से एक बायर क्रॉप साइंस के बीच आज एक ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। इस साझेदारी के तहत नौणी विश्वविद्यालय परिसर में एक अत्याधुनिक बायर लर्निंग सेंटर (BLC) की स्थापना की जाएगी, जो उद्योग और अकादमिक जगत के बीच के फासले को पाटने में मील का पत्थर साबित होगा।

इस समझौता ज्ञापन पर विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एच.एस. बवेजा तथा बायर क्रॉपसाइंस इंडिया के क्लस्टर कमर्शियल लीड (भारत, बांग्लादेश एवं श्रीलंका) डॉ. मोहन बाबू राजाराम ने आधिकारिक हस्ताक्षर किए। इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य उन्नत कृषि तकनीकों का संयुक्त प्रदर्शन, प्रसार और विद्यार्थियों के व्यावहारिक कौशल विकास (को बढ़ावा देना है। इसके तहत छात्र केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रहकर अनुभवी पेशेवरों के मार्गदर्शन में प्रैक्टिकल और इंटर्नशिप के माध्यम से व्यावसायिक अनुभव प्राप्त कर सकेंगे।

बायर कंपनी प्रदर्शन गतिविधियों के लिए आवश्यक सभी सामग्री जैसे उन्नत बीज, फसल सुरक्षा उत्पाद, उर्वरक, सूक्ष्म पोषक तत्व आदि निःशुल्क उपलब्ध कराएगी। केंद्र के सुचारू संचालन और रखरखाव के लिए आवश्यक कुशल श्रमिकों का पूरा वित्तीय खर्च भी कंपनी द्वारा वहन किया जाएगा।

इस समझौते की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि विश्वविद्यालय के परामर्श से जो विद्यार्थी इस बायर लर्निंग सेंटर (BLC) के प्रबंधन और निगरानी में सक्रिय रूप से भाग लेंगे, उन्हें कंपनी द्वारा विशेष प्रोत्साहन राशि और छात्रवृत्ति प्रदान की जाएगी। इससे छात्रों की रोजगार क्षमता बढ़ेगी। इसके अतिरिक्त, कंपनी यहाँ एक्सपोजर विजिट, फील्ड डे और विशेष तकनीकी प्रशिक्षण कार्यक्रमों का भी आयोजन करेगी।

इस अवसर पर कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. राजाराम ने कहा कि बायर लर्निंग सेंटर की स्थापना के माध्यम से बायर ऐसे कुशल विद्यार्थियों एवं पेशेवरों को तैयार करना चाहता है, जो कृषि क्षेत्र में सार्थक योगदान दे सकें। उन्होंने कहा कि इस साझेदारी से अधिक से अधिक किसानों तक भी नवीनतम ज्ञान पहुंचाने में मदद मिलेगी।

इस सहयोग को विश्वविद्यालय के लिए एक ऐतिहासिक क्षण बताते हुए कुलपति डॉ. एच.एस. बवेजा ने कहा कि यह साझेदारी विश्व की अग्रणी फसल विज्ञान कंपनियों में से एक के साथ संरचित एवं वित्तपोषित अनुसंधान सहयोग की शुरुआत है। उन्होंने कहा कि बायर की वैज्ञानिक विशेषज्ञता एवं उत्पाद पोर्टफोलियो, विश्वविद्यालय की बागवानी एवं वानिकी क्षेत्र की विशेषज्ञता के साथ मिलकर क्षेत्र के किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होंगे। उन्होंने कहा कि यह पहल विद्यार्थियों के व्यावहारिक कौशल को मजबूत करेगी, उनकी रोजगार क्षमता को बढ़ाएगी तथा विश्वविद्यालय को बागवानी ज्ञान प्रसार का क्षेत्रीय केंद्र बनने में सहायता करेगी।

समारोह के दौरान अनुसंधान निदेशक डॉ. देविना वैद्य ने विश्वविद्यालय की शोध और विस्तार गतिविधियों पर एक विस्तृत प्रस्तुति दी। इससे पूर्व, बीएलसी की नोडल अधिकारी डॉ. मनिका तोमर ने अतिथियों का स्वागत किया और पादप रोग विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अनिल हांडा ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया।

इस गरिमामयी अवसर पर बायर कंपनी की ओर से डॉ. गुलशन सिंह राणा, हेड मार्केट डेवलपमेंट, अभिनव सांख्यान, कमर्शियल मैनेजर, सोलन, रविंदर सिंह, एग्रोनॉमी एक्सपर्ट, चंडीगढ़, डॉ. नितेश फील्ड बायोलॉजिस्ट सहित विश्वविद्यालय के वैधानिक अधिकारी डॉ. डी.पी. शर्मा, सिद्धार्थ आचार्य, प्रेम सागर कौशल और कई अन्य वैज्ञानिक व संकाय सदस्य उपस्थित रहे।

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संजीव अवस्थी

समाचार रिपोर्टिंग में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव है। हिमाचल प्रदेश के कुछ सबसे प्रतिष्ठित दैनिक समाचार पत्रों में व्यापक योगदान दिया है। पिछले कई वर्षों से, विभिन्न ऑनलाइन समाचार प्लेटफार्मों के साथ सक्रिय रूप से जुड़े रहे हैं और बदलते डिजिटल मीडिया परिदृश्य के साथ तालमेल बिठाते रहे हैं।