पहाड़ों पर मैदानी तपिश: रिकॉर्ड ऊंचाई पर बसे हरिपुरधार में मौसम का बदला मिजाज

नाहन : हिमाचल प्रदेश का खूबसूरत इलाका हरिपुरधार इन दिनों प्रकृति के एक बेहद हैरान करने वाले रूप का गवाह बन रहा है। अपनी हाड़ कंपाने वाली ठंडक के लिए विख्यात यह क्षेत्र, जो ऊंचाई के मामले में शिमला की मशहूर जाखू चोटी को भी मात देता है, आजकल मैदानी इलाकों जैसी झुलसाने वाली गर्मी की चपेट में है। स्थानीय लोग मौसम के इस आक्रामक रूप को इतिहास में पहली बार देख रहे हैं और वे इसे सीधे तौर पर वैश्विक जलवायु परिवर्तन (क्लाइमेट चेंज) का असर मान रहे हैं।

समुद्र तल से लगभग 2500 मीटर (8200 फीट) की ऊंचाई पर स्थित हरिपुरधार भौगोलिक रूप से शिमला के सबसे ऊंचे बिंदु जाखू हिल (2455 मीटर) से भी अधिक ऊंचाई पर है। अमूमन इतनी ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हल्के बादल आते ही लोग गर्म कपड़े निकाल लेते थे, लेकिन आज स्थिति बिल्कुल उलट है। यहां की चुभती और तेज धूप ने न केवल स्थानीय निवासियों को हैरान किया है, बल्कि पर्यावरणविदों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है।

इस साल की गर्मी ने पिछले कई दशकों के मौसम के ढर्रे को पूरी तरह बदल कर रख दिया है। आंकड़ों की बात करें तो पिछले 2-3 दशकों में गर्मियों के दौरान यहाँ का तापमान बमुश्किल 15 से 20 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता था। इस सीजन में पारा छलांग लगाते हुए 28 से 30 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच रहा है।

स्थानीय बुजुर्गों का कहना है कि ऋतु चक्र अब पूरी तरह गड़बड़ा चुका है। इसका सीधा प्रमाण यह भी है कि बीते शीतकाल में बर्फबारी अपने तय वक्त पर न होकर काफी विलंब से हुई थी।

हरिपुरधार के वातावरण में आया यह अप्रत्याशित बदलाव महज एक मौसमी घटना नहीं, बल्कि धरती के बढ़ते तापमान का एक बड़ा संकेत है। जो ठंडी हवाएं कभी सैलानियों और स्थानीय लोगों को सुकून देती थीं, उनका मैदानी इलाकों जैसी चुभन में बदल जाना प्रकृति की ओर से मिल रही एक गंभीर चेतावनी है।

Photo of author

पंकज जयसवाल

पंकज जयसवाल, हिल्स पोस्ट मीडिया में न्यूज़ रिपोर्टर के तौर पर खबरों को कवर करते हैं। उन्हें पत्रकारिता में करीब 2 वर्षों का अनुभव है। इससे पहले वह समाज सेवी संगठनों से जुड़े रहे हैं और हजारों युवाओं को कंप्यूटर की शिक्षा देने के साथ साथ रोजगार दिलवाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है।