नाहन : स्थानीय नगर परिषद चुनाव की सियासी जंग थमने और नतीजे आने के बाद अब शहर को वापस अपनी पुरानी और खूबसूरत शक्ल में लौटाने की कवायद शुरू हो गई है। चुनाव प्रचार के दौरान पूरे नाहन शहर में जगह-जगह, लोगों के घरों की दीवारों, निजी संपत्तियों और सरकारी परिसरों पर चस्पा किए गए हज़ारों चुनावी पोस्टर और बैनर आज भी जस के तस लटके हुए हैं।
इस बीच, प्रशासन ने इस ‘पोस्टर कल्चर’ और शहर की स्वच्छता को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। नगर परिषद के अधिकारी (EO) संजय चौहान ने आधिकारिक तौर पर स्पष्ट किया है कि चुनाव संपन्न होने के बाद इन सभी चुनावी पोस्टरों और प्रचार सामग्रियों को हटाने के लिए नियमों के तहत 7 दिन का समय निर्धारित किया गया है।

चुनाव प्रचार के दौरान वोटरों को लुभाने के लिए हर वार्ड में पोस्टरों की बाढ़ आ गई थी। कई जगह तो मकान मालिकों की अनुमति के बिना ही उनके घरों के मुख्य द्वारों, दीवारों और पिलर्स पर गोंद से पोस्टर चिपका दिए गए थे, जो अब फटने लगे हैं।
शहर के बुद्धिजीवियों और जागरूक नागरिकों का कहना है कि जो पार्षद अपने वार्ड को सुंदर, साफ़ और स्वच्छ बनाने के बड़े-बड़े वादे करके चुनाव जीते हैं, उनका पहला काम तो यही होना चाहिए कि वे इस 7 दिन की अवधि के भीतर अपने समर्थकों को लगाकर पूरे वार्ड को इन प्लास्टिक-कागज़ के कचरे और पोस्टरों से मुक्त करवाएं। यदि नगर परिषद के नुमाइंदे ही अपने प्रचार तंत्र का कचरा साफ़ करने में तत्परता नहीं दिखाएंगे, तो आगामी समय में वे शहर की सफ़ाई व्यवस्था को कैसे दुरुस्त करेंगे?
लोकतंत्र के इस पर्व में प्रचार करना हर प्रत्याशी का अधिकार था, लेकिन चुनाव संपन्न होने के बाद शहर की सुंदरता को बहाल करना उनकी नैतिक और कानूनी ज़िम्मेदारी है। नगर परिषद प्रशासन द्वारा दी गई 7 दिनों की इस मोहलत के भीतर उम्मीद की जानी चाहिए कि सभी नवनिर्वाचित और चुनावी मैदान में रहे प्रत्याशी ज़िम्मेदारी निभाएंगे, ताकि नाहन की पहचान उसकी स्वच्छता से बनी रहे।